कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एक साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट किया कि पार्टी राज्य में किसी व्यक्ति विशेष को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करेगी। भाजपा इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और उनके 'विकास के एजेंडे' के भरोसे चुनावी वैतरणी पार करने की तैयारी में है।
'मोदी का नाम और विकास का काम' ही मुख्य हथियार
समिक भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि भाजपा अक्सर बिना मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चुनाव लड़ती है और जीत हासिल करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:
"हमने हरियाणा, ओडिशा और दिल्ली जैसे राज्यों में भी बिना चेहरा घोषित किए चुनाव लड़ा और सफलता पाई। हमारे लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही विकास के सबसे बड़े प्रतीक हैं, जिन पर कश्मीर से कन्याकुमारी तक जनता भरोसा करती है।"
शुभेंदु अधिकारी को दो सीटों से उतारने का संकेत
नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को नंदीग्राम के साथ-साथ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से चुनाव मैदान में उतारने पर भट्टाचार्य ने कहा कि यह तृणमूल कांग्रेस के उस दावे को परखने की चुनौती है कि 2021 में बनर्जी की हार 'लोड शेडिंग' के कारण हुई थी। हालांकि, उन्होंने शुभेंदु को सीएम फेस माने जाने के सवाल पर सीधा जवाब देने से परहेज किया और कहा कि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व और संसदीय बोर्ड ही करेगा।
सत्ता में आने पर 'घुसपैठियों' पर होगा प्रहार
भाजपा ने चुनाव के लिए अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। समिक भट्टाचार्य ने घोषणा की कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो सरकार की प्राथमिकताएं निम्नलिखित होंगी:
घुसपैठ पर नीति: घुसपैठियों की पहचान करना, उन्हें हिरासत में लेना और अंततः निर्वासित (Deport) करना।
कानून-व्यवस्था: चुनाव बाद होने वाली हिंसा को रोकना और निवेश के लिए सुरक्षित माहौल बनाना।
सभ्यतागत संघर्ष: भट्टाचार्य ने इस चुनाव को केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि एक 'निर्णायक सभ्यतागत संघर्ष' करार दिया।
मुस्लिम मतदाताओं से अपील और 'तुष्टीकरण' पर हमला
भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर 'तुष्टीकरण की राजनीति' करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे मुख्यधारा के विकास से जुड़ें, बच्चों को शिक्षित करें और राजनीतिक लाभ के लिए किए जाने वाले तुष्टीकरण से दूर रहें।
साथ ही, उन्होंने बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा सैद्धांतिक रूप से इसके पक्ष में नहीं है, अन्यथा यह कदम बहुत पहले उठाया जा सकता था।
निष्कर्ष
भाजपा की यह रणनीति साफ तौर पर सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) और पीएम मोदी की लोकप्रियता के समन्वय पर टिकी है। बंगाल की राजनीति में 'दीदी' बनाम 'मोदी' का यह सीधा मुकाबला आने वाले दिनों में और अधिक दिलचस्प होने वाला है।