पंजाब :मोहाली में जमीन अधिग्रहण पर रार: पुडा दफ्तर के बाहर किसानों का हल्ला बोल, विपक्ष ने भी कसी कमर

मोहाली में नए सेक्टरों, इंडस्ट्रियल एरिया और कमर्शियल हब के लिए जमीन एक्वायर करने की सरकारी योजना के विरोध में किसानों ने पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुडा) के कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया है। इस आंदोलन ने तब और राजनीतिक तूल पकड़ लिया जब विपक्षी दलों के दिग्गज नेता भी किसानों के समर्थन में धरने पर बैठ गए।

06 Apr 2026  |  45

 

मोहाली: पंजाब में जमीन अधिग्रहण नीति (Land Acquisition Policy) को लेकर सरकार और किसानों के बीच तकरार एक बार फिर चरम पर है। मोहाली में नए सेक्टरों, इंडस्ट्रियल एरिया और कमर्शियल हब के लिए जमीन एक्वायर करने की सरकारी योजना के विरोध में किसानों ने पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (पुडा) के कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया है। इस आंदोलन ने तब और राजनीतिक तूल पकड़ लिया जब विपक्षी दलों के दिग्गज नेता भी किसानों के समर्थन में धरने पर बैठ गए।

विपक्ष का साथ: बाजवा और सिद्धू ने सरकार को घेरा

किसानों के इस विरोध प्रदर्शन को मजबूती देने के लिए पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और मोहाली के पूर्व विधायक व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू धरना स्थल पर पहुंचे।

नीतियों पर प्रहार: दोनों नेताओं ने मौजूदा नीति को 'किसान विरोधी' करार दिया और स्पष्ट किया कि वे किसानों के हक की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं।

बदलाव की मांग: विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि वह तानाशाही रवैया छोड़कर अधिग्रहण नीति में तत्काल संशोधन करे।

किसानों की चेतावनी: "मांगें नहीं मानीं तो ठप होगा कामकाज"

धरने पर बैठे किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीनें कौड़ियों के भाव लेना चाहती है। किसानों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है:

बड़ा आंदोलन: यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो यह शांतिपूर्ण धरना जल्द ही एक व्यापक प्रदेशव्यापी आंदोलन में बदल जाएगा।

इतिहास का हवाला: किसानों ने याद दिलाया कि पहले भी विरोध के चलते सरकार को अपनी अधिग्रहण पॉलिसी वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा था।

विवाद की जड़: क्या है सरकारी योजना?

पंजाब सरकार मोहाली के विस्तार के लिए नए कमर्शियल हब और इंडस्ट्रियल जोन बनाना चाहती है। इसके लिए भारी मात्रा में जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता है। हालांकि, किसान मुआवजे की दर और जमीन के बदले मिलने वाले लाभों से असंतुष्ट हैं।

एक नजर में वर्तमान स्थिति

पक्षस्टैंड
किसानजमीन नहीं देंगे, नीति में बदलाव और उचित मुआवजे की मांग।
विपक्षसरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताकर आंदोलन का समर्थन।
प्रशासन/पुडाविकास कार्यों के लिए अधिग्रहण को जरूरी बता रहा है।

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मोहाली में बढ़ता यह असंतोष राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार बातचीत का रास्ता चुनती है या अपने फैसले पर अडिग रहती है।

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