गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव के मतदान से ठीक पहले राज्य की राजनीति में 'पासपोर्ट कांड' ने भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा के खिलाफ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए 'विदेशी नागरिकता' के आरोप उस समय धराशायी हो गए, जब मिस्र (इजिप्ट) दूतावास ने उन दस्तावेजों को सिरे से 'फर्जी' करार दे दिया।
विवाद की जड़: क्या था पवन खेड़ा का दावा?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज दावा किया था कि रिनिकी भुयान सरमा के पास मिस्र (इजिप्ट) का पासपोर्ट है। उन्होंने एक तस्वीर साझा करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने चुनावी हलफनामे में अपनी पत्नी की इस विदेशी नागरिकता की जानकारी छिपाई है। कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी।
इजिप्ट एंबेसी का खुलासा: "फोटोशॉप का खेल"
मामले के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने के बाद इजिप्ट की एंबेसी ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर कांग्रेस के दावों की हवा निकाल दी।
सच्चाई: दूतावास ने साफ किया कि पवन खेड़ा द्वारा दिखाई गई पासपोर्ट कॉपी पूरी तरह फेक है।
तकनीकी धोखाधड़ी: वह पासपोर्ट नंबर किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है, जिस पर रिनिकी भुयान सरमा का नाम और तस्वीर AI और फोटोशॉप के जरिए अवैध रूप से चिपकाई गई थी।
रिनिकी भुयान सरमा का 'ज्वालामुखी' प्रहार
दूतावास के खुलासे के बाद रिनिकी भुयान सरमा ने कांग्रेस और पवन खेड़ा पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा:
"ऐसा लगता है जैसे उन्हें (पवन खेड़ा) किसी पागल कुत्ते ने काट लिया हो। कांग्रेस के पास लोगों को बदनाम करने के अलावा कोई काम नहीं बचा है। वे एआई और फोटोशॉप का इस्तेमाल कर घटिया रणनीति अपना रहे हैं। पिछले दो सालों से मेरे परिवार और बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। यह पूरे असमिया समाज के सामने एक शर्मनाक उदाहरण है।"
बीजेपी को मिला 'विक्टिम कार्ड', कांग्रेस रक्षात्मक
इस खुलासे के बाद असम में बीजेपी पूरी तरह हमलावर मुद्रा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:
सहानुभूति की लहर: मुख्यमंत्री के परिवार पर व्यक्तिगत और तकनीकी हमले से बीजेपी को जनता के बीच 'विक्टिम कार्ड' खेलने का मौका मिल गया है।
कानूनी शिकंजा: रिनिकी भुयान सरमा ने इस मानहानि और जालसाजी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिससे पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
साख पर संकट: बिना पुष्टि के 'फेक दस्तावेज' पेश करना कांग्रेस के लिए चुनावी मौसम में 'आत्मघाती गोल' साबित हो सकता है।
निष्कर्ष: 'सच बनाम फोटोशॉप' की जंग
23 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान से पहले असम की राजनीति अब 'बौद्धिक दिवालियापन बनाम राजनीतिक शुचिता' के मुद्दे पर सिमट गई है। जहां भाजपा इसे कांग्रेस की हताशा बता रही है, वहीं कांग्रेस इस तकनीकी विफलता के बाद रक्षात्मक स्थिति में नजर आ रही है।