पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: मतदाता सूची से 90 लाख से अधिक नाम हटे, ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में भी बड़ा 'खेला'

चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में आए इस बड़े बदलाव ने राज्य के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से हिला दिया है। चुनाव आयोग (ECI) की न्यायिक समीक्षा और SIR प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

07 Apr 2026  |  4

 

कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य की सियासत में 'वोटर लिस्ट' को लेकर घमासान छिड़ गया है। चुनाव आयोग (ECI) की न्यायिक समीक्षा और SIR प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। ताजा आंकड़ों (अपुष्ट) के अनुसार, 60 लाख विचाराधीन मामलों की समीक्षा के बाद 27 लाख और नाम काट दिए गए हैं, जिनमें अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है।

1. भवानीपुर और बालीगंज: ममता की सीट पर बड़ा असर

Alt News और अन्य फैक्ट-चेकिंग विश्लेषणों के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपनी सीट भवानीपुर में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

भवानीपुर: यहाँ मुस्लिम आबादी लगभग 21.9% है, लेकिन एडजुडिकेशन (न्यायिक समीक्षा) के दायरे में आए मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी 51.8% है। यानी हर 4 में से 1 मुस्लिम मतदाता की पात्रता की समीक्षा की गई।

बालीगंज: यहाँ मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी 54.3% है, लेकिन एडजुडिकेशन के मामलों में उनका हिस्सा 75% पाया गया। यहाँ हिंदुओं की तुलना में मुस्लिम वोटरों के नाम कटने की दर तीन गुना अधिक है।

2. 'हाई-एडजुडिकेशन बेल्ट': इन 5 जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई

राज्य के 5 जिलों को सबसे संवेदनशील माना गया है, जहाँ कुल विचाराधीन मामलों के लगभग 58.65% हिस्से दर्ज थे:

मुर्शिदाबाद: सबसे ज्यादा 11.01 लाख मामले।

मालदा: 8.28 लाख मामले।

उत्तर 24 परगना: 5.91 लाख मामले।

दक्षिण 24 परगना: 5.22 लाख मामले।

उत्तर दिनाजपुर: 4.80 लाख मामले।

इन जिलों में न केवल मुस्लिम आबादी अधिक है, बल्कि मतुआ समुदाय की भी बड़ी आबादी है, जिनके नाम कटने की भी भारी आशंका जताई जा रही है।

3. अब तक का कुल गणित: 7.66 करोड़ में से 90 लाख बाहर

चुनाव आयोग द्वारा SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले बंगाल की मूल मतदाता सूची में 7,66,37,529 मतदाता थे।

पहला चरण: अंतिम सूची प्रकाशन तक करीब 63 लाख नाम हटाए गए थे।

दूसरा चरण (ताजा): न्यायिक समीक्षा के बाद 27 लाख और नाम अयोग्य माने गए हैं।

कुल कटौती: अब तक 90 लाख से अधिक नाम कट चुके हैं, जो कुल मतदाता आधार का एक बड़ा हिस्सा है।

4. टीएमसी की चिंता और चुनाव आयोग का तर्क

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि मुस्लिम और मतुआ समुदाय उनके बड़े वोट बैंक माने जाते हैं। पार्टी अब इस मुद्दे को लेकर कोलकाता से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है।

ECI का रुख: आयोग का तर्क है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को 'त्रुटिहीन और पारदर्शी' बनाने के लिए की गई है। हालांकि, आयोग धर्म के आधार पर आंकड़े जारी नहीं करता, लेकिन क्षेत्रीय डेटा संकेत दे रहा है कि प्रभावित होने वालों में एक विशेष समुदाय की संख्या अधिक है।

विकल्प: जिन लोगों के नाम कटे हैं, वे ट्रिब्यूनल के पास अपील कर सकते हैं, लेकिन जब तक फैसला उनके पक्ष में नहीं आता, वे मतदान के पात्र नहीं होंगे।

निष्कर्ष

7 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार, बंगाल की मतदाता सूची का यह 'फिल्ट्रेशन' आने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजों को पूरी तरह बदल सकता है। जहाँ बीजेपी इसे पारदर्शी चुनाव की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं टीएमसी इसे 'लोकतंत्र पर हमला' और अपने वोट बैंक को निशाना बनाने की साजिश करार दे रही है।

क्या प्रभावित मतदाता समय रहते अपनी अपील दर्ज करा पाएंगे, या यह 90 लाख की कटौती ममता बनर्जी की सत्ता की राह में सबसे बड़ी बाधा बनेगी? यह आने वाले महीनों की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा होगी।

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