नई दिल्ली | आगामी खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई से पहले किसानों को खाद की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। पश्चिमी एशिया (मिडल ईस्ट) के संकट के बीच ऊर्जा आपूर्ति और उर्वरक उत्पादन को स्थिर रखने के लिए 'इंडियन पोटाश लिमिटेड' (IPL) ने वैश्विक बाजारों से 25 लाख टन यूरिया आयात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यूरिया आयात और निविदा (Tender)
खरीफ सीजन (जून) में धान, मक्का और सोयाबीन की बुवाई शुरू होने वाली है। घरेलू उत्पादन में आई कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर आयात का सहारा लिया है:
कुल आयात: 25 लाख टन यूरिया।
वितरण: 15 लाख टन पश्चिमी तट और 10 लाख टन पूर्वी तट के जरिए भारत पहुंचेगा।
समय सीमा: निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 15 अप्रैल है और खेप 14 जून तक बंदरगाहों से रवाना होने की उम्मीद है।
गैस आपूर्ति में सुधार: उत्पादन को गति
खाद कारखानों के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, जो युद्ध के कारण प्रभावित होकर 60% तक गिर गई थी, अब काफी हद तक बहाल कर दी गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, अब खाद इकाइयों को उनकी आवश्यकता का 90% गैस उपलब्ध कराया जा रहा है।
कतर से एलएनजी (LNG) आपूर्ति बंद होने के बावजूद भारत ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे वैकल्पिक देशों से गैस खरीदकर कमी को पूरा किया है।
आम जनता पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार ने आश्वस्त किया है कि इस वैश्विक संकट का घरेलू बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा:
घरेलू ईंधन सुरक्षित: घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस (PNG) और परिवहन के लिए CNG की 100% आपूर्ति जारी रहेगी।
खाद्य सुरक्षा: उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कोई असामान्य उतार-चढ़ाव नहीं है। सरकार के पास गेहूँ और चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है।
जमाखोरी पर लगाम: केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें।
मुख्य बिंदु:
घरेलू यूरिया उत्पादन में प्रति माह लगभग 6 से 7 लाख टन की गिरावट आई थी, जिसकी भरपाई इस नए आयात से की जाएगी। नवंबर में यूरिया की कीमत 418.40 डॉलर प्रति टन थी, लेकिन वर्तमान संघर्ष को देखते हुए नई कीमतों पर सभी की नजर बनी हुई है।