एमपी में 'किसान कल्याण वर्ष' का आगाज़: आज से शुरू होगी गेहूं खरीदी, सीएम मोहन यादव ने कहा— "₹2700 प्रति क्विंटल तक ले जाएंगे दाम"

मध्य प्रदेश में आज से गेहूं उपार्जन (खरीदी) की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो रही है। किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा | किसानों की सुविधा के लिए सभी जिलों के कलेक्टर्स और एसडीएम को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं |

09 Apr 2026  |  40

 

भोपाल | मध्य प्रदेश सरकार ने अन्नदाताओं की समृद्धि और उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में आज से गेहूं उपार्जन (खरीदी) की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के किसानों से इस व्यवस्था का लाभ उठाने की अपील करते हुए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है।

किसान कल्याण वर्ष 2026: एक संकल्प

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार वर्ष 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है। इस अवसर पर किसान प्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से वर्चुअल संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य ध्येय किसानों की आय में निरंतर वृद्धि करना है।

कीमतों पर बड़ा ऐलान

किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

"गेहूं की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन हम इसे ₹2700 प्रति क्विंटल तक ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम दिलवाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।"

उपार्जन केंद्रों पर चाक-चौबंद व्यवस्था

किसानों की सुविधा के लिए सभी जिलों के कलेक्टर्स और एसडीएम को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं:

सुविधाएं: केंद्रों पर पेयजल, छायादार स्थान और बैठने की सुगम व्यवस्था की गई है।

हेल्प डेस्क और कंट्रोल रूम: जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। साथ ही, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में भी एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है जो पूरे प्रदेश की उपार्जन गतिविधियों पर सीधी नजर रखेगा।

जागरूकता: होर्डिंग्स और पंपलेट्स के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं और खरीदी प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है।

सामाजिक संस्थाओं से सहयोग की अपील

मुख्यमंत्री ने सामाजिक और सेवाभावी संस्थाओं से भी इस व्यापक अभियान में जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर आने वाले किसानों को केवल फसल खरीदी तक सीमित न रखकर, उन्हें शासन की अन्य जन-कल्याणकारी योजनाओं से भी अवगत कराया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: प्रदेश में बारदाने (बोरी) की पर्याप्त उपलब्धता और सुगम भुगतान प्रक्रिया के साथ सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए ठोस धरातल पर कार्य शुरू हो चुका है।

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