टाटा संस IPO: वेणु श्रीनिवासन के समर्थन से हलचल तेज, क्या शेयर बाजार में उतरेगी टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी कंपनी?

टाटा ट्रस्ट्स के वरिष्ठ ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने पहली बार टाटा संस के IPO का समर्थन कर संकेत दिया है कि समूह के रुख में बड़ा बदलाव आ रहा है।

09 Apr 2026  |  41

 

मुंबई | भारत के सबसे प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के सार्वजनिक सूचीबद्धता (IPO) की चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस बार संकेत किसी बाहरी सूत्र से नहीं, बल्कि समूह के भीतर से मिले हैं। टाटा ट्रस्ट्स के वरिष्ठ ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने पहली बार टाटा संस के IPO का समर्थन कर संकेत दिया है कि समूह के रुख में बड़ा बदलाव आ रहा है।

वेणु श्रीनिवासन का बड़ा बयान

श्रीनिवासन ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम इस संभावित IPO की दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा:

"यदि RBI टाटा संस को 'अपर लेयर' NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) के रूप में वर्गीकृत करता है, तो नियमों के तहत कंपनी की लिस्टिंग अनिवार्य हो जाएगी। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक बाजार में उतरना कंपनी के लिए एक आवश्यक कदम होगा।"

क्यों अहम है यह कदम?

टाटा संस अब तक एक अनलिस्टेड कंपनी रही है, जिस पर टाटा ट्रस्ट्स का नियंत्रण है। जुलाई 2025 में ट्रस्ट ने इसे अनलिस्टेड रखने का ही निर्णय लिया था, लेकिन अब बदली परिस्थितियों और रेगुलेटरी दबाव ने इस फैसले पर विचार करने को मजबूर कर दिया है।

शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप की बढ़ी उम्मीदें

टाटा संस में लगभग 18% की हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी ग्रुप के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है। SP ग्रुप लंबे समय से अपनी हिस्सेदारी के जरिए नकदी जुटाने का रास्ता तलाश रहा है ताकि वह अपने कर्ज को कम कर सके। टाटा संस की लिस्टिंग उनके निवेश की सही वैल्यू सामने लाएगी और उन्हें बाजार में अपनी हिस्सेदारी बेचने का सीधा विकल्प प्रदान करेगी।

लिस्टिंग के संभावित लाभ और चुनौतियां

पारदर्शिता और मूल्यांकन: लिस्टिंग से कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और उसका वास्तविक बाजार मूल्य दुनिया के सामने आएगा।

पूँजी का प्रवाह: IPO के जरिए मिलने वाले फंड से टाटा समूह अपने नए और भविष्य के व्यवसायों (जैसे सेमीकंडक्टर, डिजिटल और ईवी) में बड़ा निवेश कर सकेगा।

आंतरिक मतभेद: समूह के भीतर एक पक्ष जहाँ लिस्टिंग को विकास का माध्यम मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष नियंत्रण खोने और समूह की विरासत के प्रभावित होने के डर से इसे प्राइवेट ही रखना चाहता है।

RBI के फैसले पर टिकी निगाहें

फिलहाल, गेंद रिजर्व बैंक के पाले में है। अगर RBI अपने आगामी सर्कुलर में टाटा संस को 'अपर लेयर' NBFC की श्रेणी में बरकरार रखता है, तो नियमों के मुताबिक कंपनी को 2025-26 के अंत तक लिस्ट होना पड़ सकता है। शेयर बाजार के विशेषज्ञ इसे दशक का सबसे बड़ा IPO मान रहे हैं, जो भारतीय बाजार की दिशा बदल सकता है।

एक नज़र में:

समर्थन: टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने पहली बार IPO का समर्थन किया।

कारण: RBI के 'अपर लेयर' NBFC नियम लिस्टिंग को अनिवार्य बना सकते हैं।

फायदा: टाटा समूह को नई पूँजी मिलेगी और SP ग्रुप को कर्ज चुकाने का मौका।

अगला कदम: RBI के नए सर्कुलर और नियमों की समीक्षा का इंतजार।

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