वाशिंगटन/नई दिल्ली | विश्व बैंक ने अपनी नवीनतम ‘दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट’ रिपोर्ट में भारत की विकास यात्रा को लेकर सकारात्मक लेकिन सतर्क रुख अपनाया है। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत के विकास अनुमान को बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। यह सुधार घरेलू मांग में मजबूती और कर सुधारों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।
विकास के सारथी: GST और घरेलू मांग
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की विकास दर वित्त वर्ष 2025 के 7.1% से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 7.6% तक पहुँचने की उम्मीद है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
निजी खपत में वृद्धि: कम मुद्रास्फीति और GST दरों में की गई कटौती से उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ी है।
निर्यात में स्थिरता: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर मजबूती से टिका हुआ है।
FY27 के लिए चुनौतियां: ऊर्जा और वैश्विक संघर्ष
विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष 2027 में विकास की रफ्तार कुछ धीमी होकर 6.6% रह सकती है। इसके पीछे प्रमुख वैश्विक कारण बताए गए हैं:
मध्य-पूर्व संकट: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच हालिया सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है। हालांकि 8 अप्रैल से दो हफ्ते का सीजफायर प्रभावी है, लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव चिंताजनक है।
महंगी ऊर्जा: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा की ऊंची कीमतों से घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे परिवारों की खर्च करने योग्य आय (Disposable Income) कम होगी।
सब्सिडी का बोझ: ईंधन और उर्वरक पर बढ़ते सब्सिडी खर्च के कारण सरकारी खर्च की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
तुलनात्मक विश्लेषण: अन्य संस्थाओं के अनुमान
भारत की विकास दर को लेकर विभिन्न वैश्विक और राष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमानों में भिन्नता है:
| संस्था | FY27 विकास अनुमान (%) |
|---|---|
| भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) | 6.9% |
| विश्व बैंक (World Bank) | 6.6% |
| OECD | 6.1% |
| Moody’s Ratings | 6.0% |
Export to Sheets
निर्यात और निवेश पर असर
विश्व बैंक का मानना है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बाजारों तक बेहतर पहुंच का लाभ भारत को मिल रहा है, लेकिन प्रमुख व्यापारिक भागीदारों की अपनी विकास दर धीमी होने के कारण निर्यात की कुल रफ्तार सीमित रह सकती है। साथ ही, कच्चे माल की बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितता के कारण निजी निवेश में भी सुस्ती आने की आशंका है।
निष्कर्ष: विश्व बैंक की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत आंतरिक सुधारों (जैसे GST) के दम पर मजबूत बना हुआ है, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट भविष्य की राह में बड़े रोड़े साबित हो सकते हैं।