जब सदी के महानायक ने मान ली थी हार: 11 फ्लॉप फिल्में और जया का वो एक फैसला, जिसने बदल दिया बॉलीवुड का इतिहास

अमिताभ बच्चन के करियर की शुरुआत इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि वे अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बॉलीवुड छोड़ने का मन बना चुके थे। संघर्ष के उस काले दौर में अगर एक शख्स ढाल बनकर खड़ा न होता, तो शायद भारतीय सिनेमा को अपना 'एंग्री यंग मैन' कभी नहीं मिलता। वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि उनकी हमसफर जया बच्चन थीं।

09 Apr 2026  |  42

 

मुंबई। आज जिन्हें हम 'शहंशाह', 'सदी के महानायक' और 'बिग बी' जैसे विशेषणों से नवाजते हैं, उन्हीं अमिताभ बच्चन के करियर की शुरुआत इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि वे अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बॉलीवुड छोड़ने का मन बना चुके थे। संघर्ष के उस काले दौर में अगर एक शख्स ढाल बनकर खड़ा न होता, तो शायद भारतीय सिनेमा को अपना 'एंग्री यंग मैन' कभी नहीं मिलता। वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि उनकी हमसफर जया बच्चन थीं।

11 फ्लॉप फिल्मों का बोझ और टूटने का कगार

70 के दशक की शुरुआत में अमिताभ बच्चन ने फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से कदम रखा था। इसके बाद 'आनंद', 'रेश्मा और शेरा' और 'परवाना' जैसी कुछ फिल्मों में उनके काम को सराहा तो गया, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वे सफलता का स्वाद चखने को तरस रहे थे। लगातार 11 फ्लॉप फिल्में देने के बाद अमिताभ पूरी तरह टूट चुके थे। उन्हें लगने लगा था कि मुंबई की गलियां उनके लिए नहीं बनी हैं।

'जंजीर': जब दिग्गजों ने फेरा मुंह

उसी दौरान लेखक जोड़ी सलीम-जावेद ने 'जंजीर' की पटकथा तैयार की। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म के लिए अमिताभ पहली पसंद नहीं थे। प्रकाश मेहरा इस रोल के लिए धर्मेंद्र, देव आनंद और दिलीप कुमार जैसे सुपरस्टार्स के पास गए, लेकिन तीनों ने ही इस फिल्म को ठुकरा दिया। अंततः यह फिल्म अमिताभ के पास आई।

हीरोइन मिलने में आ रही थी दिक्कत

फिल्म में मुख्य अभिनेता तो मिल गया, लेकिन चुनौती अभी बाकी थी। उस दौर की कोई भी नामी अभिनेत्री अमिताभ बच्चन के साथ काम करने को तैयार नहीं थी, क्योंकि उनके नाम के साथ 'फ्लॉप एक्टर' का टैग जुड़ चुका था। साथ ही, फिल्म में हीरोइन का किरदार बहुत छोटा था।

सलीम खान का सुझाव और जया का त्याग

लेखक सलीम खान ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में खुलासा किया कि कैसे जया बच्चन ने अमिताभ के डूबते करियर को सहारा दिया। सलीम खान ने बताया:

"अमिताभ एक शानदार अभिनेता थे, उनकी आवाज और व्यक्तित्व में दम था, लेकिन खराब फिल्मों के कारण उन्हें फ्लॉप का इल्जाम झेलना पड़ रहा था। जब कोई हीरोइन तैयार नहीं हुई, तो मैंने जया बच्चन का नाम सुझाया।"

जब जया को कहानी सुनाई गई, तो उन्होंने साफ कहा था कि इसमें उनके लिए करने को कुछ खास नहीं है। तब सलीम खान ने उनसे कहा था, "यह रोल आपके लिए भले ही छोटा हो, लेकिन यह अमिताभ के करियर के लिए संजीवनी साबित होगा।" अमिताभ के प्रति अपने प्रेम और उनके हुनर पर भरोसे के चलते जया ने इस फिल्म के लिए 'हां' कह दिया।

इतिहास बन गई 'जंजीर'

जया बच्चन का वह फैसला न केवल अमिताभ के करियर के लिए, बल्कि पूरे बॉलीवुड के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। 'जंजीर' सुपरहिट रही और यहीं से जन्म हुआ उस महानायक का, जिसने अगले कई दशकों तक बॉक्स ऑफिस पर राज किया।

आज जब हम अमिताभ बच्चन की सफलता की गाथा सुनते हैं, तो उसके पीछे जया बच्चन का वह मौन समर्थन और त्याग एक स्तंभ की तरह नजर आता है, जिसने हार मान चुके एक कलाकार को 'शहंशाह' बना दिया।

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