Sensex @95,000: मॉर्गन स्टेनली की भविष्यवाणी, दिसंबर 2026 तक भारतीय शेयर बाजार में आएगी 22% की भारी तेजी

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि भारतीय शेयर बाजार अब एक बड़ी रैली के लिए तैयार है और सेंसेक्स दिसंबर 2026 के अंत तक 95,000 अंक के स्तर को छू सकता है।

09 Apr 2026  |  32

 

मुंबई। शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली की ताजा रिपोर्ट ने निवेशकों में नया जोश भर दिया है। अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि भारतीय शेयर बाजार अब एक बड़ी रैली के लिए तैयार है और सेंसेक्स दिसंबर 2026 के अंत तक 95,000 अंक के स्तर को छू सकता है।

निवेशकों के लिए 'गोल्डन चांस'

मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, मौजूदा बाजार की स्थिति दीर्घकालिक निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर है। ब्रोकरेज ने अपने 'बेस केस सिनेरियो' में कहा है कि सेंसेक्स मौजूदा स्तरों से लगभग 22 प्रतिशत तक चढ़ सकता है। रिपोर्ट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

गिरावट का अंत: कम मूल्यांकन (Valuation) और आय में सुधार के संकेत बताते हैं कि बाजार में गिरावट का दौर अब समाप्त हो सकता है।

सीमित जोखिम: रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में आगे बढ़ने की संभावना ज्यादा है, जबकि नीचे गिरने का जोखिम (Downside risk) काफी कम नजर आ रहा है।

अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ

ब्रोकरेज फर्म ने भारत के प्रति अपने सकारात्मक दृष्टिकोण के पीछे कई ठोस कारण गिनाए हैं। पिछले एक साल में भले ही बाजार का प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से कमजोर रहा हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था का आधार अभी भी चट्टान की तरह मजबूत है।

"मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत स्थिरता और सरकारी खर्च (CAPEX) में सुधार जैसे कारक बाजार को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।" — मॉर्गन स्टेनली रिपोर्ट

ऐतिहासिक रूप से सस्ता हुआ बाजार

रिपोर्ट में एक दिलचस्प तुलना सोने (Gold) के साथ की गई है। मॉर्गन स्टेनली ने बताया कि:

सोने के मुकाबले गिरावट: सेंसेक्स वर्तमान में सोने के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। ऐतिहासिक रूप से, यह स्थिति बाजार में एक बड़े 'टर्नअराउंड' यानी सुधार का संकेत होती है।

प्राइस-टू-बुक रेश्यो: भारत का प्राइस-टू-बुक रेश्यो भी ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर के करीब है, जो कि निवेश के लिहाज से एक सस्ता विकल्प नजर आता है।

आय चक्र (Earnings Cycle) में सुधार

विश्लेषकों का मानना है कि उपभोग, निवेश और सेवाओं के क्षेत्रों में मजबूत रुझान दिख रहे हैं। वैश्विक कॉर्पोरेट मुनाफे में भारत की हिस्सेदारी अब तक के सबसे बड़े अंतर से उसके सूचकांक भार (Index weight) से अधिक हो गई है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कंपनियों के मुनाफे में और सुधार होगा, जिससे शेयर बाजार को सीधा सहारा मिलेगा।

निष्कर्ष: हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक विकास की चुनौतियां बरकरार हैं, लेकिन मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि भारतीय बाजार इन झटकों को झेलने में सक्षम है और आने वाले दो साल निवेशकों के लिए बेहद मुनाफे वाले साबित हो सकते हैं।

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