कूटनीतिक दबाव के आगे झुके पाकिस्तानी रक्षा मंत्री; इजरायल विरोधी विवादित 'एक्स' पोस्ट को किया डिलीट

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इजरायल के खिलाफ की गई अपनी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी को कूटनीतिक हंगामे के बाद हटा लिया है। गुरुवार को साझा की गई अपनी पोस्ट में ख्वाजा आसिफ ने लेबनान, गाजा और ईरान में इजरायली सैन्य कार्रवाइयों की तीखी निंदा की थी।

10 Apr 2026  |  26

 

इस्लामाबाद/यरूशलेम। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इजरायल के खिलाफ की गई अपनी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी को कूटनीतिक हंगामे के बाद हटा लिया है। इस पोस्ट में आसिफ ने इजरायल को 'मानवता के लिए अभिशाप' और 'कैंसर जैसी सत्ता' करार दिया था, जिस पर इजरायली नेतृत्व ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

क्या था विवादित पोस्ट में?

गुरुवार को साझा की गई अपनी पोस्ट में ख्वाजा आसिफ ने लेबनान, गाजा और ईरान में इजरायली सैन्य कार्रवाइयों की तीखी निंदा की थी। उन्होंने लिखा था:

"एक तरफ शांति वार्ता चल रही है, दूसरी तरफ लेबनान में नरसंहार हो रहा है। मैं प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने फलस्तीनी जमीन पर इस 'कैंसर जैसी' सत्ता को खड़ा किया, वे नरक में जलें।"

इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मध्यस्थता करने की क्षमता और उसकी कूटनीतिक तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे थे।

इजरायल का कड़ा पलटवार: "बर्दाश्त के बाहर है ऐसी भाषा"

आसिफ की टिप्पणी पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने तत्काल और तीखी प्रतिक्रिया दी। नेतन्याहू ने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश से, जो खुद को शांति का मध्यस्थ बताता है, इस तरह की "विनाशकारी मांग" और आपत्तिजनक भाषा कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

वहीं, इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी पाकिस्तानी नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाते हुए कहा:

यह बयान खुले तौर पर यहूदी-विरोधी (Anti-Semitic) और झूठे आरोपों से प्रेरित है।

इजरायल को 'कैंसर' कहना वास्तव में उसके अस्तित्व को मिटाने का आह्वान है।

इजरायल उन आतंकवादियों के खिलाफ अपना बचाव जारी रखेगा जिन्होंने उसे खत्म करने की कसम खाई है।

हंगामे के बाद बैकफुट पर पाकिस्तान

इजरायल की ओर से आई इस तीखी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ख्वाजा आसिफ ने अपनी पोस्ट डिलीट करने में ही भलाई समझी। जानकारों का मानना है कि इस विवाद ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की उन कोशिशों को झटका दिया है, जिसमें वह खुद को ईरान और अमेरिका के बीच एक संतुलित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था।

लेबनान में जारी सैन्य तनाव के बीच आए इस बयान ने न केवल इजरायल और पाकिस्तान के बीच वाकयुद्ध को तेज किया, बल्कि वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की कूटनीतिक परिपक्वता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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