हरियाणा : बैसाखी से पहले ही खेतों में चली दरांतियां, खराब मौसम के डर से 'इमरजेंसी' कटाई में जुटे किसान

गेहूं की कटाई का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है , लेकिन इस बार खराब मौसम और बारिश की आशंका ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। किसान अपनी मेहनत की कमाई को वर्षा की भेंट चढ़ने से बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

10 Apr 2026  |  34

 

रोड़ी (सिरसा) | हरियाणा के सिरसा जिले के रोड़ी और आसपास के गांवों में इस बार बैसाखी की पारंपरिक रौनक से पहले ही खेतों में गेहूं की कटाई का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। आमतौर पर किसान 13 अप्रैल को बैसाखी पर्व मनाने के बाद ही कटाई का श्रीगणेश करते हैं, लेकिन इस बार खराब मौसम और बारिश की आशंका ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

फसल बचाने की होड़: मजदूर और कंबाइन दोनों का सहारा

किसान अपनी मेहनत की कमाई को वर्षा की भेंट चढ़ने से बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। खेतों में किसान अपने पूरे परिवार के साथ दरांतियां लेकर जुटे नजर आ रहे हैं।

कंबाइन का उपयोग: बड़े किसान समय बचाने के लिए कंबाइन मशीनों की मदद ले रहे हैं ताकि जल्द से जल्द फसल मंडियों तक पहुंच सके।

पशु चारे की चिंता: छोटी जोत वाले किसान और पशुपालक अब भी हाथों से कटाई को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि थ्रेसर के माध्यम से गेहूं निकालने पर पशुओं के लिए पर्याप्त 'तूड़ा' (चारा) मिल सके।

मजदूरों की किल्लत और बढ़ी हुई लागत

फसल कटाई के सीजन में मजदूरों का मिलना एक बड़ी चुनौती बन गया है। किसानों का कहना है कि मजदूरों की भारी मांग के कारण उनकी मजदूरी दरें बढ़ गई हैं, जिससे खेती की लागत में इजाफा हुआ है। समय पर मजदूर न मिलने की वजह से कई किसानों को न चाहते हुए भी कंबाइन का सहारा लेना पड़ रहा है।

पैदावार पर मौसम की मार: चमक और वजन दोनों घटे

स्थानीय किसानों—बिंदर सिंह, मल सिंह और कुलविंदर सिंह ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि इस साल कुदरत की बेरुखी का असर फसल की गुणवत्ता पर साफ दिख रहा है।

"खराब मौसम के कारण प्रति एकड़ 5 से 10 मन तक पैदावार कम होने की संभावना है। मंडियों में आ रहे गेहूं के दानों में वह पहले जैसी चमक नहीं है और उनमें हल्का कालापन भी महसूस हो रहा है।"

लगातार बदलते मौसम के मिजाज ने न केवल कटाई का समय बदल दिया है, बल्कि किसानों की आर्थिक उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। फिलहाल, किसान जल्द से जल्द अपनी फसल को सुरक्षित स्थान या मंडी तक पहुँचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।

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