बिहार में बड़े सियासी बदलाव की आहट: नीतीश कुमार दे सकते हैं इस्तीफा, जदयू मंत्रिमंडल में दिखेगा 'नया जोश'

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगले दो से तीन दिनों के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, इस संभावित इस्तीफे के साथ ही सत्ता के समीकरणों को नए सिरे से सजाने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

11 Apr 2026  |  15

 

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगले दो से तीन दिनों के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, इस संभावित इस्तीफे के साथ ही सत्ता के समीकरणों को नए सिरे से सजाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) इस बार कई चौंकाने वाले नाम शामिल कर सकती है।

युवा चेहरों पर दांव: पहली बार के विधायकों को मिल सकता है मौका

इस बार जदयू की रणनीति में 'अनुभव' के साथ-साथ 'युवा ऊर्जा' का तालमेल देखने को मिल सकता है। चर्चा है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में पहली बार जीतकर आए युवा विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य प्रशासन में नई ऊर्जा लाना और सामाजिक व क्षेत्रीय समीकरणों को और अधिक संतुलित बनाना है।

मंत्रिमंडल की दौड़ में शामिल प्रमुख नए चेहरे:

डॉ. कुमार पुष्पंजय (बरबीघा), इंद्रदेव सिंह (बड़हरिया)

समृद्ध वर्मा (सिकटा), सोनम रानी सरदार (त्रिवेणीगंज)

विशाल कुमार (नरकटिया), श्वेता गुप्ता (शिवहर)

नागेंद्र राउत (सुरसंड), अतिरेक कुमार (कुशेश्वरस्थान)

इनके अलावा कोमल सिंह, आदित्य कुमार, ऋतुराज कुमार और रुहेल रंजन जैसे नामों पर भी कयास लगाए जा रहे हैं।

अनुभवी दिग्गजों के कार्यभार में कटौती संभव

वर्तमान में जदयू कोटे के मंत्रियों में ज्यादातर चेहरे नीतीश कुमार के कोर ग्रुप के अनुभवी नेता हैं। इनमें विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव और श्रवण कुमार जैसे दिग्गज शामिल हैं, जिनके पास फिलहाल दो से तीन महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है।

वर्तमान स्थिति पर एक नजर:

विजय कुमार चौधरी: जल संसाधन, भवन निर्माण और संसदीय कार्य जैसे भारी-भरकम विभाग।

बिजेंद्र प्रसाद यादव: ऊर्जा, वित्त और योजना एवं विकास विभाग।

सुनील कुमार: शिक्षा एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग।

सूत्रों के अनुसार, नए मंत्रियों के आने से इन अनुभवी नेताओं के कार्यभार को कम किया जा सकता है, ताकि वे संगठन और नीतिगत कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकें।

2025 का लक्ष्य: सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन

जदयू नेतृत्व का मानना है कि नए चेहरों को मौका देकर पार्टी न केवल युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करेगी, बल्कि विभिन्न जिलों और समुदायों को भी सरकार में उचित प्रतिनिधित्व देगी। यदि नीतीश कुमार इस्तीफा देकर नई सरकार का गठन करते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी, जहां अनुभव की परिपक्वता और युवाओं का उत्साह एक साथ नजर आएगा।

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