इस्लामाबाद वार्ता पर कांग्रेस का 'विश्वगुरु' पर कटाक्ष: "आतंक के आका को कूटनीतिक 'ब्रोकर' कैसे बनने दिया?"

कांग्रेस पार्टी ने इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार की विदेश नीति की "विनाशकारी विफलता" करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि जिस पाकिस्तान को भारत ने वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने का दावा किया था, वह आज एक कूटनीतिक 'मध्यस्थ' के रूप में कैसे उभर आया?

11 Apr 2026  |  23

 

नई दिल्ली। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज से शुरू हो रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता ने भारत में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस घटनाक्रम को केंद्र सरकार की विदेश नीति की "विनाशकारी विफलता" करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि जिस पाकिस्तान को भारत ने वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने का दावा किया था, वह आज एक कूटनीतिक 'मध्यस्थ' के रूप में कैसे उभर आया?

'हग्लमसी' (Huglomacy) पर जयराम रमेश का प्रहार

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की शैली पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि "स्वघोषित विश्वगुरु" की 'झप्पी कूटनीति' (Huglomacy) आज गंभीर सवालों के घेरे में है।

रमेश ने अपने बयान में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए:

पहलगाम हमला और पाकिस्तान का कद: अप्रैल 2025 में हुए कायराना पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की भूमिका के बावजूद उसे कूटनीतिक मुख्यधारा में वापस आने का मौका कैसे मिला?

पुरानी कूटनीति का हवाला: उन्होंने 2008 के मुंबई हमलों (26/11) का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को सफलतापूर्वक दुनिया में अलग-थलग कर दिया था, जबकि वर्तमान सरकार के दौरान एक "टूटा हुआ देश (Broken Country) अब ब्रोकर देश (Broker Country)" बन गया है।

'नमस्ते ट्रंप' और 'हाउडी मोदी' पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ व्यक्तिगत संबंधों को काफी महत्व दिया था।

"मिस्टर मोदी के 'नमस्ते ट्रंप', 'हाउडी मोदी' और 'फिर एक बार ट्रंप सरकार' जैसे अभियानों के बाद भी भारत ने अमेरिका को यह अनुमति कैसे दे दी कि वह पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका सौंपे?" — जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव

वैश्विक कूटनीति में पाकिस्तान की वापसी?

यह विवाद ऐसे समय में उपजा है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस एक उच्च स्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मिलने इस्लामाबाद पहुंचे हैं।

होर्मुज संकट: पिछले छह हफ्तों से जारी युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली 20% तेल आपूर्ति बाधित है।

शांति की उम्मीद: पूरी दुनिया इस वार्ता से युद्धविराम की उम्मीद कर रही है, लेकिन भारत में विपक्ष इसे देश के रणनीतिक हितों के लिए एक बड़ा झटका मान रहा है।

सुरक्षा और आर्थिक चिंताएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच सफल मध्यस्थता करता है, तो दक्षिण एशिया में उसकी कूटनीतिक प्रासंगिकता फिर से बढ़ सकती है। कांग्रेस का आरोप है कि यह स्थिति भारत द्वारा पाकिस्तान को 'आतंकवाद की जननी' बताने और उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिबंधित कराने के प्रयासों को कमजोर करती है।

निष्कर्ष: इस्लामाबाद में चल रही यह वार्ता न केवल मध्य-पूर्व का भविष्य तय करेगी, बल्कि भारत के भीतर भी विदेश नीति को लेकर आगामी विधानसभा और आम चुनावों में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है।

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