मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में दिग्गज निवेशकों और बड़े समूहों की एक छोटी सी हलचल भी शेयरों की किस्मत बदल देती है। ताजा उदाहरण जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड (JP Power) का है, जिसके शेयरों में उद्योगपति गौतम अडानी के एक 'मास्टरस्ट्रोक' के बाद जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। अडानी समूह द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की खबर ने इस छोटे शेयर को 'रॉकेट' बना दिया है।
14,500 करोड़ की डील और जेपी पावर का कनेक्शन
मार्च 2026 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अडानी एंटरप्राइजेज के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया। अडानी ग्रुप ने 14,535 करोड़ रुपये की सफल बोली लगाकर दिवालिया हो चुकी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) का अधिग्रहण कर लिया है।
तेजी की मुख्य वजह: जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) असल में जेपी पावर की प्रमोटर कंपनी है और इसमें उसकी 24 फीसदी हिस्सेदारी है। इस डील के बाद जेपी पावर के थर्मल और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट्स पर अब परोक्ष रूप से अडानी ईकोसिस्टम का नियंत्रण हो गया है। इसी मजबूत बैकअप ने निवेशकों के भरोसे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
शेयर बाजार में जेपी पावर का प्रदर्शन
अडानी की एंट्री की खबर के बाद जेपी पावर के शेयर में भारी खरीदारी का दौर जारी है:
मौजूदा भाव: ₹17.0
एक महीने का रिटर्न: 27% (शानदार उछाल)
एक हफ्ते का रिटर्न: लगभग 12%
मार्केट कैप: ₹11,658 करोड़
52 हफ्ते का हाई/लो: ₹27.70 / ₹12.52
क्या करती है कंपनी? (बिज़नेस प्रोफाइल)
1994 में स्थापित जयप्रकाश पावर वेंचर्स के पास 2220 मेगावाट (MW) बिजली उत्पादन की विशाल क्षमता है। कंपनी के तीन प्रमुख पावर प्लांट देश की ऊर्जा जरूरतों में अहम भूमिका निभा रहे हैं:
विष्णुप्रयाग हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट (उत्तराखंड): 400 MW क्षमता।
जेपी बीना थर्मल पावर प्लांट (मध्य प्रदेश): 500 MW क्षमता।
जेपी निगरी सुपरक्रिटिकल थर्मल प्लांट (सिंगरौली): 1320 MW क्षमता।
बिजली उत्पादन के अलावा, कंपनी कोयला व रेत खनन और सीमेंट ग्राइंडिंग के कारोबार में भी सक्रिय है। कंपनी के पास अपनी कोयला खदानें (जैसे अमेलिया खदान) और फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट भी मौजूद हैं।
भविष्य की राह: निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जेपी पावर के पास बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत था, लेकिन वित्तीय संकट के कारण कंपनी संघर्ष कर रही थी। अब अडानी समूह जैसी आर्थिक महाशक्ति का साथ मिलने से कंपनी के परिचालन (Operations) में सुधार आएगा, कर्ज का बोझ कम होगा और मुनाफे में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। लंबे समय के नजरिए से यह डील छोटे निवेशकों के लिए 'गेम-चेंजर' साबित हो सकती है।