कैलिफोर्निया/नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp के लिए साल 2026 कानूनी और साख की चुनौतियों से भरा साबित हो रहा है। अमेरिका में मेटा (Meta) के खिलाफ चल रहे एक बड़े क्लास-एक्शन मुकदमे ने ऐप की प्राइवेसी दावों की पोल खोल दी है। इस विवाद में अब टेक जगत के दो दिग्गजों—एलन मस्क और टेलीग्राम के सीईओ पावेल डुरोव—ने भी एंट्री मारी है, जिससे यह मामला वैश्विक स्तर पर गरमा गया है।
मुकदमे के संगीन आरोप: क्या 'एंड-टू-एंड' एन्क्रिप्शन एक दिखावा है?
यूएस कोर्ट में चल रहे इस मुकदमे में मेटा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
मैसेज एक्सेस का दावा: आरोप है कि व्हाट्सएप अपने कर्मचारियों, कॉन्ट्रैक्टर और थर्ड पार्टी को यूजर्स के प्राइवेट मैसेज एक्सेस करने की अनुमति देता है।
बायपास तकनीक: शिकायत के अनुसार, मेटा का इंटरनल सिस्टम एन्क्रिप्शन को बायपास कर सकता है, जिससे वे जरूरत पड़ने पर संदेशों को रिव्यू (Review) कर सकते हैं।
भ्रामक प्रचार: मुकदमा यह दावा करता है कि कंपनी ने 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' के नाम पर करोड़ों यूजर्स को गुमराह किया है।
एलन मस्क का हमला: "व्हाट्सएप भरोसे लायक नहीं"
इस कानूनी मामले से जुड़े एक वायरल पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, X (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने सीधे तौर पर मार्क जकरबर्ग पर निशाना साधा। मस्क ने लिखा:
"WhatsApp पर भरोसा नहीं कर सकते।"
मस्क यहीं नहीं रुके, उन्होंने यूजर्स से अपील की कि वे अधिक सुरक्षित ऑडियो और वीडियो कॉलिंग के लिए X प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो जाएं। मस्क लगातार X चैट्स को मेटा के ऐप्स के मुकाबले ज्यादा प्राइवेट और सुरक्षित विकल्प के तौर पर प्रमोट कर रहे हैं।
टेलीग्राम सीईओ का बयान: "इतिहास का सबसे बड़ा फ्रॉड"
टेलीग्राम के सीईओ पावेल डुरोव ने भी इस विवाद में अपनी राय रखी। उन्होंने व्हाट्सएप के एन्क्रिप्शन मॉडल को 'कंज्यूमर फ्रॉड' करार देते हुए कहा:
"व्हाट्सएप का एन्क्रिप्शन इतिहास का सबसे बड़ा कंज्यूमर फ्रॉड हो सकता है। यह दावा कुछ भी करे, लेकिन हकीकत में यह मैसेज पढ़ता है और उन्हें थर्ड पार्टी के साथ शेयर करता है।"
एक तकनीकी विरोधाभास: व्हाट्सएप बनाम टेलीग्राम
प्राइवेसी की इस जंग में एक बड़ा तकनीकी पेच भी है जिसे समझना जरूरी है:
WhatsApp: यह डिफ़ॉल्ट रूप से सभी चैट्स के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करता है (जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं)।
Telegram: टेलीग्राम की 'स्टैंडर्ड चैट्स' क्लाउड-बेस्ड होती हैं और वे डिफ़ॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होतीं। इसमें यह सुविधा केवल 'सीक्रेट चैट्स' फीचर में ही मिलती है।
मेटा की सफाई
इन तमाम आरोपों और मस्क के हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए मेटा ने सभी दावों को पूरी तरह से निराधार बताया है। कंपनी का कहना है कि उनकी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक दुनिया की सबसे सुरक्षित तकनीकों में से एक है और कोई भी (मेटा भी नहीं) यूजर्स के मैसेज नहीं पढ़ सकता।
निष्कर्ष: जैसे-जैसे कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ेगी, व्हाट्सएप की प्राइवेसी की हकीकत दुनिया के सामने आएगी। फिलहाल, इस विवाद ने करोड़ों यूजर्स को अपनी डिजिटल प्राइवेसी के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है।