ईरान युद्ध का 'फूड शॉक': खाद और ईंधन के संकट ने बढ़ाई चावल की किल्लत, 2026-27 में गहरा सकता है वैश्विक खाद्य संकट

ईंधन की कमी और खाद की आसमान छूती कीमतों ने दक्षिण-पूर्व एशिया के 'राइस बाउल' (Rice Bowl) को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि थाईलैंड से लेकर कंबोडिया तक के किसान अब अपनी फसल काटने से भी हिचकिचा रहे हैं।

11 Apr 2026  |  21

 

बैंकॉक/नोम पेन्ह। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की आंशिक नाकेबंदी ने न केवल ऊर्जा बाजार को हिलाया है, बल्कि अब दुनिया की आधी आबादी के मुख्य भोजन—चावल—पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईंधन की कमी और खाद की आसमान छूती कीमतों ने दक्षिण-पूर्व एशिया के 'राइस बाउल' (Rice Bowl) को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि थाईलैंड से लेकर कंबोडिया तक के किसान अब अपनी फसल काटने से भी हिचकिचा रहे हैं।

किसानों की दोहरी मार: ईंधन और खाद का संकट

चावल की खेती के लिए ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और कटाई की मशीनों को चलाने हेतु डीजल की आवश्यकता होती है, जबकि बेहतर पैदावार के लिए पोटैशियम और यूरिया जैसे उर्वरक अनिवार्य हैं।

लागत में उछाल: खेती की लागत (इनपुट कॉस्ट) दोगुनी से तीन गुनी हो गई है।

होर्मुज स्ट्रेट का असर: ईरान युद्ध के कारण खाद और तेल की आपूर्ति का यह मुख्य मार्ग बाधित है। अस्थायी युद्धविराम के बावजूद जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हुई है, जिससे खाद की कमी पैदा हो गई है।

थाईलैंड और फिलीपींस: उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका

थाईलैंड: दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में से एक थाईलैंड में मार्च-अप्रैल की फसल पिछले साल के मुकाबले 19% कम रहने का अनुमान है। कई किसान कटाई में देरी कर रहे हैं क्योंकि डीजल इतना महंगा है कि फसल काटना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

फिलीपींस: प्रमुख आयातक देश होने के नाते यहां स्थिति और भयावह है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि फिलीपींस का चावल उत्पादन इस साल 10% (लगभग 2 मिलियन टन) तक गिर सकता है, जिसका असर सितंबर-अक्टूबर के त्योहारी सीजन में दिखेगा।

कंबोडिया: यहाँ के लगभग 10% किसानों ने अगली फसल की बुवाई न करने का फैसला किया है जब तक कि उन्हें सरकार या कंपनियों से 'गारंटीड रिटर्न' नहीं मिल जाता।

भारत और चीन की स्थिति: फिलहाल स्थिरता, पर खतरा बरकरार

चीन: चीन अपनी विशाल ऊर्जा और खाद भंडारण क्षमता के कारण इस झटके से अब तक सुरक्षित रहा है।

भारत: भारत में मुख्य बुवाई (खरीफ) का मौसम शुरू होने में अभी कुछ महीने बाकी हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार में चावल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन की बाधाएं भारत की निर्यात नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। यदि वैश्विक कमी बढ़ती है, तो भारत को घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगाने पड़ सकते हैं।

विकल्पों की तलाश: चावल छोड़ मक्का की ओर किसान

संकट से निपटने के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया के किसान अब पारंपरिक तरीकों को बदल रहे हैं:

कम पानी वाली फसलें: डीजल से चलने वाले सिंचाई पंपों पर निर्भरता कम करने के लिए किसान चावल की जगह मक्का उगा रहे हैं।

ग्रीन एनर्जी: कंबोडिया जैसी जगहों पर अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और सोलर वॉटर पंप की मांग बढ़ गई है।

जैविक खाद: रासायनिक खादों की कमी को पूरा करने के लिए 'बायो-ऑर्गेनिक' खाद के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी: "भंडार पर न रहें निर्भर"

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य अगले 20-30 दिनों तक और बाधित रहता है, तो साल की दूसरी छमाही में भोजन की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ेगा। इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के अनुसार, हालांकि मौजूदा स्टॉक राहत दे रहा है, लेकिन उत्पादन में गिरावट को हल्के में लेना वैश्विक फूड सिक्योरिटी के लिए आत्मघाती हो सकता है।

निष्कर्ष: ईरान युद्ध ने साबित कर दिया है कि आधुनिक खेती पूरी तरह से वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है। यदि इस्लामाबाद में जारी शांति वार्ता जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कर पाती, तो 2026-27 का साल वैश्विक बाजार में 'महंगे अनाज' के नाम रह सकता है।

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