मध्यप्रदेश बजट 2026-27: 'रोलिंग बजट' पेश करने वाला देश का पहला राज्य बना MP; किसान, बुनियादी ढांचे और सोशल वेलफेयर पर रिकॉर्ड निवेश

यह मध्यप्रदेश के इतिहास का एक क्रांतिकारी बजट है, जो न केवल विकास की नई इबारत लिख रहा है बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए वित्तीय प्रबंधन का एक मॉडल भी पेश कर रहा है।

11 Apr 2026  |  21

 

भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश कर एक नया इतिहास रच दिया है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत ₹4.38 लाख करोड़ से अधिक का यह बजट न केवल विकासोन्मुखी है, बल्कि इसमें भारत का पहला 'रोलिंग बजट' (Rolling Budget) मॉडल पेश किया गया है।

नवाचारी वित्तीय योजना: रोलिंग बजट और MPI पर फोकस

मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने रोलिंग बजट प्रणाली अपनाई है। इसके तहत केवल 2026-27 के अनुमान ही नहीं, बल्कि आगामी दो वर्षों के वित्तीय अनुमान भी पेश किए गए हैं, ताकि दीर्घकालिक परियोजनाओं में निरंतरता बनी रहे। यह बजट नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) पर आधारित है, जिसका सीधा लक्ष्य गरीबी को जड़ से खत्म करना और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करना है।

2026 'किसान कल्याण वर्ष': कृषि के लिए ₹1.15 लाख करोड़ का खजाना

राज्य सरकार ने साल 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित किया है। अन्नदाताओं की आय और सुरक्षा के लिए बजट में ₹1.15 लाख करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है।

यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना: ग्रामीण डेयरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 80 लाख छात्रों को टेट्रा पैक में दूध दिया जाएगा। इसके लिए 5 वर्षों में ₹6,600 करोड़ खर्च होंगे।

पर्यावरण और कृषि: 'समृद्धि वन' परियोजना और 'कृषि वानिकी योजना' के माध्यम से वनीकरण और निजी भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाएगा।

बुनियादी ढांचा और शहरी कायाकल्प

राज्य के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ₹1.06 लाख करोड़ का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित है।

द्वारका (DWARAKA) योजना: शहरी विकास के लिए ₹5,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसके लिए InvITs और REITs जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों का उपयोग होगा।

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन: ग्वालियर में एक विशेष जोन स्थापित किया जाएगा ताकि इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम हो सके।

ग्रामीण आवास: ग्रामीण भूमि अधिकार योजना के तहत स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क का पूरा खर्च सरकार उठाएगी, जिसके लिए ₹3,800 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

सामाजिक कल्याण और शिक्षा-स्वास्थ्य पर जोर

लाड़ली बहना योजना: महिला सशक्तिकरण के लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान।

शिक्षा: ₹31,953 करोड़ का आवंटन, जिसमें प्राथमिक स्कूलों के लिए ₹11,444 करोड़ शामिल हैं।

स्वास्थ्य: ₹24,144 करोड़ का बजट, सामुदायिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान।

गौ संरक्षण: गौशालाओं और पशुधन विकास के लिए ₹621 करोड़ सुरक्षित किए गए हैं।

पर्यटन और संस्कृति का वैश्विक विस्तार

बुंदेलखंड के खजुराहो को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र बनाने और ओरछा को 'आइकॉनिक टूरिस्ट साइट' के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए भी प्रारंभिक बजट आवंटित किया गया है।

विशेष दृष्टिकोण: बिना किसी नए कर (Tax) प्रस्ताव के पेश किया गया यह बजट एक ओर जहाँ वित्तीय अनुशासन और नवाचार का संगम है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, 'आउटकम-ड्रिवन' प्लानिंग और निजी पूंजी के लिए 'सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड्स' की लिस्टिंग जैसे कदमों ने मध्यप्रदेश को भारतीय सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में एक 'प्रयोगशाला' के रूप में स्थापित कर दिया है।

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