नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर: LG मनोज सिन्हा का ड्रग तस्करों पर 'डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक', रद्द होंगे आधार और पासपोर्ट

(LG) मनोज सिन्हा ने प्रदेश को नशे के जाल से पूरी तरह मुक्त करने के लिए अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। जम्मू के एमए स्टेडियम में '100-दिवसीय नशा मुक्त जम्मू और कश्मीर अभियान' का शुभारंभ करते हुए LG ने ड्रग तस्करों को सीधी चेतावनी दी है कि अब उनके बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

11 Apr 2026  |  21

 

जम्मू: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने प्रदेश को नशे के जाल से पूरी तरह मुक्त करने के लिए अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। जम्मू के एमए स्टेडियम में '100-दिवसीय नशा मुक्त जम्मू और कश्मीर अभियान' का शुभारंभ करते हुए LG ने ड्रग तस्करों को सीधी चेतावनी दी है कि अब उनके बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

दस्तावेज होंगे रद्द, संपत्तियां होंगी जब्त

प्रशासन ने तस्करों के खिलाफ एक नई और बेहद सख्त 'मानक संचालन प्रक्रिया' (SOP) लागू की है। इसके तहत ड्रग्स के काले कारोबार में शामिल अपराधियों पर न केवल मुकदमे चलेंगे, बल्कि उनके नागरिक अधिकारों पर भी प्रहार किया जाएगा:

दस्तावेज निरस्तीकरण: नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त पाए जाने वालों के पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए जाएंगे।

आर्थिक चोट: तस्करों के बैंक खाते फ्रीज किए जाएंगे और उनकी सभी चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया जाएगा।

सार्वजनिक शर्मिंदगी: बड़े तस्करों की पहचान कर उन्हें पुलिस थाना स्तर पर सार्वजनिक रूप से बेनकाब किया जाएगा।

पड़ोसी देश की साजिश: नार्को-टेररिज्म पर कड़ा प्रहार

LG मनोज सिन्हा ने साफ तौर पर पड़ोसी देश (पाकिस्तान) की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां से भेजा जा रहा 'जहर' दरअसल आतंकवाद को वित्तीय मदद देने का एक हथियार है। उन्होंने कहा कि यह हमारे युवाओं को खोखला करने की एक गहरी साजिश है। एजेंसियों को निर्देश देते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा— "निर्दोष को छेड़ो मत, और दोषी को छोड़ो मत।"

पुनर्वास और नए नियम: 2026 की नई नियमावली

प्रशासन ने केवल दंडात्मक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पीड़ितों के इलाज पर भी ध्यान केंद्रित किया है:

नशा मुक्ति केंद्र नियम, 2026: सरकार ने 'जम्मू और कश्मीर नशा विकार उपचार, परामर्श और पुनर्वास केंद्र नियम, 2026' लागू किया है। इसके तहत केवल उन्हीं नशा मुक्ति केंद्रों को अनुमति मिलेगी जिनके पास पर्याप्त सुविधाएं और विशेषज्ञ होंगे।

सामाजिक भागीदारी: LG ने माताओं और बहनों से इस आंदोलन का नेतृत्व करने की अपील की है ताकि समाज के भीतर से जागरूकता की लहर पैदा हो सके।

प्रशासन का संकल्प: यह अभियान केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। पदयात्राओं और जमीनी स्तर पर जागरूकता के जरिए इसे एक जन-आंदोलन बनाया जा रहा है ताकि जम्मू-कश्मीर के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

अन्य खबरें