गेहूं खरीद की शर्तों में ढील दे सरकार: भाकियू (चढ़ूनी) ने उठाई 14% नमी और मुआवजे की मांग

भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गेहूं खरीद के नियमों में तुरंत बदलाव किया जाए। खरीद के लिए निर्धारित 12 प्रतिशत नमी की शर्त को बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाए।

12 Apr 2026  |  16

 

कुरुक्षेत्र। खराब मौसम और बेमौसम बारिश की मार झेल रहे किसानों के हक में अब भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने मोर्चा खोल दिया है। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने केंद्र और प्रदेश सरकार से मांग की है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गेहूं खरीद के नियमों में तुरंत बदलाव किया जाए।

नमी की सीमा 12% से बढ़ाकर 14% करने की मांग

रविवार सुबह जारी एक वीडियो संदेश में गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि जब से फसल पककर तैयार हुई है, तभी से ओलावृष्टि और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी है। धूप कम निकलने के कारण मंडियों में रखा गेहूं सूख नहीं पा रहा है।

मुख्य मांग: खरीद के लिए निर्धारित 12 प्रतिशत नमी की शर्त को बढ़ाकर 14 प्रतिशत किया जाए।

लस्टर लॉस: बेमौसम बारिश से गेहूं की चमक (Luster) कम होने पर भी किसानों को राहत दी जाए और गुणवत्ता मानकों में ढील मिले।

आगजनी पर मुआवजे की गुहार

चढ़ूनी ने फसल में आग लगने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि आगजनी से होने वाले शत-प्रतिशत नुकसान की भरपाई न तो बीमा कंपनियां कर रही हैं और न ही सरकार कोई आर्थिक मदद दे रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पीड़ित किसानों को तुरंत विशेष मुआवजा दिया जाए।

पोर्टल और उत्पादन नियमों पर घेरा

भाकियू ने 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को भी उठाया है। उन्होंने मांग की है कि:

प्रति एकड़ उत्पादन दर्ज करने के नियमों में कम से कम 10 प्रतिशत तक की छूट दी जाए।

प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल की कम पैदावार या गुणवत्ता में कमी का खामियाजा किसान को न भुगतना पड़े।

"यह एक प्राकृतिक आपदा है। किसान का इसमें कोई दोष नहीं है। सरकार को नमी और लस्टर लॉस के कड़े नियमों को त्यागकर किसान की परेशानी समझनी चाहिए और उनकी मेहनत का दाना-दाना खरीदना चाहिए।" — गुरनाम सिंह चढ़ूनी

मंडियों के बिगड़े हालात

यूनियन का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता के कारण मंडियां अनाज से अंट गई हैं। उठान की धीमी गति और कड़े मानकों की वजह से किसान अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। यदि सरकार ने समय रहते इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो किसान और अधिक आर्थिक संकट में फंस जाएगा।

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