संसद का विशेष सत्र: महिला आरक्षण पर महामंथन की तैयारी, भाजपा ने जारी किया सांसदों को 'थ्री-लाइन व्हिप'

रतीय जनता पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सदस्यों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। भाजपा ने अपने सभी सांसदों के लिए अनिवार्य उपस्थिति का फरमान जारी कर दिया है।

12 Apr 2026  |  8

 

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए संसद के विशेष सत्र ने देश की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस तीन दिवसीय सत्र का मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर ऐतिहासिक चर्चा और प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सत्ताधारी दल भाजपा ने अपने सभी सांसदों के लिए अनिवार्य उपस्थिति का फरमान जारी कर दिया है।

भाजपा का सख्त निर्देश: छुट्टी पर पूर्ण पाबंदी

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सदस्यों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि 16 से 18 अप्रैल के बीच सदन में उपस्थिति अनिवार्य है।

अनिवार्य उपस्थिति: सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को तीनों दिन सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लेना होगा।

कोई अवकाश नहीं: इस अवधि के दौरान किसी भी सदस्य की छुट्टी मंजूर नहीं की जाएगी।

रणनीति: व्हिप का उद्देश्य विधेयक पर मतदान या चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष मजबूती से रखना और संख्या बल सुनिश्चित करना है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर टिकी नजरें

सूत्रों के अनुसार, सत्र का प्राथमिक उद्देश्य महिला आरक्षण विधेयक से जुड़ी संवैधानिक अड़चनों को दूर करना और इसके क्रियान्वयन की राह प्रशस्त करना है। सरकार इस कदम के जरिए महिला सशक्तिकरण के अपने एजेंडे को निर्णायक मोड़ देना चाहती है।

विपक्ष की मांग: "पहले सर्वदलीय बैठक बुलाए सरकार"

विशेष सत्र की घोषणा के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है।

मल्लिकार्जुन खरगे का पत्र: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

विपक्ष की चिंता: विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण के साथ जुड़ा परिसीमन का मुद्दा बेहद संवेदनशील है। खरगे ने आरोप लगाया कि विपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही सत्र बुला लिया गया है, जबकि कई महत्वपूर्ण तकनीकी विवरण अब भी स्पष्ट नहीं हैं।

सत्र के प्रमुख बिंदु

तिथिविवरण
16-18 अप्रैल 2026विशेष संसद सत्र की अवधि (गुरुवार से शनिवार)
मुख्य विषयमहिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा
भाजपा की स्थितिसांसदों को 'थ्री-लाइन व्हिप' जारी, उपस्थिति अनिवार्य
विपक्ष की स्थितिपरिसीमन पर स्पष्टता और सर्वदलीय बैठक की मांग

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निष्कर्ष: आगामी तीन दिन भारतीय संसदीय इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। जहां सरकार इसे महिला सशक्तिकरण के 'मास्टरस्ट्रोक' के रूप में देख रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी दांव और तकनीकी पेच के चश्मे से देख रहा है। 16 अप्रैल से शुरू होने वाली कार्यवाही में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने के पूरे आसार हैं।

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