नई दिल्ली | भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अगले महीने यानी मई के दूसरे सप्ताह से लागू होने जा रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, इस समझौते के लागू होने से न केवल व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, बल्कि 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 56 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी आसान हो जाएगा।
भारतीय निर्यातकों के लिए 'गोल्डन चांस'
इस समझौते के तहत भारत को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत से ब्रिटेन जाने वाला 99 प्रतिशत निर्यात अब शून्य शुल्क (Zero Duty) पर होगा। इसका सीधा लाभ इन क्षेत्रों को मिलेगा:
कपड़ा और परिधान (Textiles)
रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewelry)
जूते-चप्पल (Footwear)
खेल का सामान और खिलौने
ब्रिटिश उत्पादों पर घटेगी ड्यूटी: कार और शराब प्रेमियों के लिए खुशखबरी
भारत ने भी ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं। समझौते की शर्तों के अनुसार:
स्कॉच व्हिस्की: वर्तमान में 150 प्रतिशत लगने वाले आयात शुल्क को तत्काल प्रभाव से घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा। 2035 तक इसे और कम कर 40 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है।
ब्रिटिश कारें: 110 प्रतिशत तक लगने वाले भारी आयात शुल्क को अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
इसके बदले में भारतीय वाहन निर्माताओं को ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन बाजार में विशेष पहुंच मिलेगी।
'दोहरा योगदान संधि' (DCC) से कर्मियों को राहत
FTA के साथ-साथ दोहरा योगदान संधि (DCC) को भी एक साथ लागू किए जाने की संभावना है। यह संधि उन पेशेवरों और अस्थायी कर्मियों के लिए वरदान साबित होगी जो दोनों देशों के बीच काम के सिलसिले में आते-जाते हैं। अब उन्हें दोनों देशों में अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा शुल्क (Social Security Tax) नहीं देना पड़ेगा।
"यह समझौता 24 जुलाई, 2025 को हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) का हिस्सा है। हमारा लक्ष्य है कि 2030 तक व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान की जाए।" — व्यापार मंत्रालय के अधिकारी
उपभोक्ता उत्पादों के लिए खुला बाजार
ब्रिटेन से आने वाली चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे प्रीमियम उपभोक्ता उत्पादों पर भी शुल्क में कटौती की गई है, जिससे भारतीय बाजारों में इनकी उपलब्धता बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतें भी संतुलित रह सकती हैं।
मई से लागू होने वाला यह समझौता न केवल भारतीय विनिर्माताओं के लिए वैश्विक बाजार खोलेगा, बल्कि भारत के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।