सुरों के साथ क्रिकेट से भी था गहरा नाता: , सचिन तेंदुलकर को मानती थीं अपना 'सगा बेटा'

आशा ताई का व्यक्तित्व केवल रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक सीमित नहीं था; खेल जगत, विशेषकर क्रिकेट के साथ उनका रिश्ता बेहद भावनात्मक और गहरा रहा। आशा भोसले और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बीच माँ-बेटे जैसा रिश्ता था। सचिन अक्सर आशा ताई से मिलने उनके घर जाते थे।

12 Apr 2026  |  6

 

मुंबई | संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का आज अंत हो गया। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। थकान और सीने में संक्रमण के चलते उन्हें शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे आनंद भोसले ने जानकारी दी कि उनका अंतिम संस्कार सोमवार, 13 अप्रैल को शाम 4 बजे मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में किया जाएगा।

संगीत और क्रिकेट का अद्भुत संगम

आशा ताई का व्यक्तित्व केवल रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक सीमित नहीं था; खेल जगत, विशेषकर क्रिकेट के साथ उनका रिश्ता बेहद भावनात्मक और गहरा रहा।

1. सचिन तेंदुलकर: संगीत की मल्लिका का 'बेटा' आशा भोसले और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बीच माँ-बेटे जैसा रिश्ता था। सचिन अक्सर आशा ताई से मिलने उनके घर जाते थे। साल 2023 की एक मुलाकात को याद करते हुए सचिन ने लिखा था कि आशा ताई को सुनना हमेशा जादुई होता है। इसके जवाब में आशा जी ने कहा था, "मैं सचिन की इज्जत तो करती ही हूँ, लेकिन उन्हें अपने बेटे की तरह प्यार भी करती हूँ।"

2. सचिन के नाम में छिपा 'बर्मन' कनेक्शन एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि सचिन तेंदुलकर का नाम संगीत की दुनिया से ही निकला है। उनके पिता रमेश तेंदुलकर, महान संगीतकार एस.डी. बर्मन के बहुत बड़े प्रशंसक थे, इसलिए उन्होंने अपने बेटे का नाम 'सचिन' रखा। संयोग देखिए कि एस.डी. बर्मन के बेटे आर.डी. बर्मन (पंचम दा) की शादी आशा भोसले से हुई थी।

3. ब्रेट ली के साथ जुगलबंदी आशा जी का क्रिकेट प्रेम सरहदों के पार भी था। साल 2006 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ब्रेट ली के साथ एक गाना 'यू आर द वन फॉर मी' रिकॉर्ड किया था। ब्रेट ली ने इस गाने के बोल महज 30 मिनट में लिखे थे और आशा जी के साथ उनकी यह जुगलबंदी 'आशा एंड फ्रेंड्स' प्रोजेक्ट का मुख्य आकर्षण बनी थी।

सम्मानों से अलंकृत सफर

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे अधिक गाने दर्ज कराने वाली आशा जी को भारत सरकार ने पद्म विभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया था। 'दम मारो दम' से लेकर 'अभी ना जाओ छोड़कर' जैसे कालजयी गीतों के माध्यम से उनकी आवाज हमेशा अमर रहेगी।

"आशा ताई जहाँ भी जाती हैं, हमेशा खुशियाँ फैलाती हैं। उनकी समय की समझ और सेंस ऑफ ह्यूमर गजब का है।" — सचिन तेंदुलकर

मंगेशकर परिवार की इस लाडली बेटी का जाना कला और खेल दोनों जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। पूरा देश अपनी इस 'आशा' को नम आंखों से विदाई दे रहा है।

अन्य खबरें