नई दिल्ली | पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने तेजी के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए, जिसका सीधा असर देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन (MCap) पर देखने को मिला। आंकड़ों के अनुसार, टॉप-10 में से 8 कंपनियों के सामूहिक वैल्यूएशन में 4,13,003.23 करोड़ रुपए का भारी इजाफा हुआ। इस दौरान बैंकिंग सेक्टर का दबदबा रहा, जहाँ एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़े फायदे में रहे।
बाजार की रिकॉर्ड छलांग
पिछले कारोबारी सप्ताह में बीएसई (BSE) का बेंचमार्क सेंसेक्स 4,230.7 अंक (5.77%) उछला, वहीं एनएसई (NSE) का निफ्टी 1,337.5 अंक (5.88%) की बढ़त के साथ बंद हुआ।
इन 8 दिग्गज कंपनियों ने मारी बाजी
| कंपनी | वैल्यूएशन में बढ़ोतरी (₹ करोड़) | कुल मार्केट कैप (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| HDFC Bank | +91,282.67 | 12,47,478.57 |
| ICICI Bank | +76,036.36 | 9,46,741.85 |
| Bajaj Finance | +60,980.35 | 5,75,206.47 |
| L&T | +47,624.97 | 5,44,736.59 |
| Bharti Airtel | +45,873.43 | 10,66,293.69 |
| SBI | +43,614.67 | 9,84,629.98 |
| TCS | +26,303.49 | 9,13,331.92 |
| HUL | +21,287.29 | 5,06,477.89 |
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रिलायंस और इंफोसिस को मामूली घाटा
बाजार में हर तरफ हरियाली के बावजूद दो दिग्गज कंपनियों के वैल्यूएशन में गिरावट दर्ज की गई:
Infosys: इसका मार्केट कैप 3,285.03 करोड़ रुपए घटकर 5,24,124.40 करोड़ रुपए रह गया।
Reliance Industries: देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस के वैल्यूएशन में 947.28 करोड़ रुपए की मामूली गिरावट आई और यह 18,27,086.79 करोड़ रुपए पर आ गया।
तेजी के पीछे के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे दो प्रमुख वैश्विक कारण रहे:
भू-राजनीतिक राहत: अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की उम्मीदों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा जगाया।
कच्चे तेल में गिरावट: कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था और महंगाई की चिंताएं कम हुईं, जिससे बाजार में जोरदार खरीदारी लौटी।
वैल्यूएशन के आधार पर टॉप-5 रैंकिंग
गिरावट के बावजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के पद पर बरकरार है। टॉप-5 की सूची इस प्रकार है:
रिलायंस इंडस्ट्रीज
एचडीएफसी बैंक
भारती एयरटेल
भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
आईसीआईसीआई बैंक
निष्कर्ष: विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि तेजी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना इस हफ्ते निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।