डिजिटल दुनिया में फ्रांस की 'आजादी': सरकारी सिस्टम से हटेगा Windows, अब Linux संभालेगा कमान

यूरोप के शक्तिशाली राष्ट्र फ्रांस ने डिजिटल आत्मनिर्भरता की ओर एक क्रांतिकारी कदम बढ़ाते हुए अपने सरकारी वर्कस्टेशन से अमेरिकी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट के Windows ऑपरेटिंग सिस्टम को हटाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के निर्देशों के बाद, फ्रांस सरकार अब अपने पूरे डिजिटल ढांचे को ओपन-सोर्स Linux पर शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है।

12 Apr 2026  |  5

 

 

पेरिस | यूरोप के शक्तिशाली राष्ट्र फ्रांस ने डिजिटल आत्मनिर्भरता की ओर एक क्रांतिकारी कदम बढ़ाते हुए अपने सरकारी वर्कस्टेशन से अमेरिकी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट के Windows ऑपरेटिंग सिस्टम को हटाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के निर्देशों के बाद, फ्रांस सरकार अब अपने पूरे डिजिटल ढांचे को ओपन-सोर्स Linux पर शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है।

आत्मनिर्भरता और डेटा सुरक्षा का बड़ा मिशन

फ्रांस सरकार का यह निर्णय केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम है। इसके पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं:

डिजिटल संप्रभुता: अमेरिकी टेक कंपनियों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना।

डेटा कंट्रोल: सरकारी और नागरिक डेटा को विदेशी सर्वरों और कानूनों के प्रभाव से बचाकर देश के भीतर सुरक्षित रखना।

सुरक्षा: गैर-यूरोपीय तकनीकी ढांचे में संभावित सेंधमारी या जासूसी के खतरों को कम करना।

शुरुआत DINUM से, फिर पूरा सिस्टम

इस मिशन की कमान DINUM (डिजिटल मामलों का अंतर-मंत्रालयी निदेशालय) को सौंपी गई है। सबसे पहले इसी विभाग के सिस्टम्स को Linux पर बदला जाएगा। इसके बाद DGE, ANSSI और DAE जैसी महत्वपूर्ण एजेंसियां भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगी। अंततः इस बदलाव को पूरे सरकारी तंत्र में अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

Linux ही क्यों?

सरकार ने Linux को चुनने के पीछे इसकी मजबूती और लचीलेपन को मुख्य आधार बताया है:

ओपन सोर्स: Linux एक स्वतंत्र सिस्टम है जिसे फ्रांस अपनी विशिष्ट सुरक्षा जरूरतों के अनुसार 'कस्टमाइज' कर सकता है।

सुरक्षा और गति: Windows की तुलना में Linux को वायरस और साइबर हमलों के प्रति अधिक सुरक्षित और हल्का (lightweight) माना जाता है।

लागत में कमी: लाइसेंस फीस के रूप में अमेरिकी कंपनियों को दिए जाने वाले अरबों यूरो की बचत होगी।

अमेरिका से बढ़ती 'डिजिटल' दूरी

फ्रांस का यह रुख पिछले कुछ समय से लगातार सख्त हो रहा है। ऑपरेटिंग सिस्टम से पहले फ्रांस ने संचार के लिए भी विदेशी टूल्स पर कैंची चलाई है:

Visio का उदय: Zoom और Microsoft Teams जैसे अमेरिकी प्लेटफॉर्म्स की जगह अब फ्रांस अपने स्वदेशी टूल 'Visio' (जो Jitsi पर आधारित है) का उपयोग कर रहा है।

वैश्विक ट्रेंड: फ्रांस अकेला नहीं है; चीन ने भी 2023 में अपना 'OpenKylin' ऑपरेटिंग सिस्टम लॉन्च कर इसी तरह की राह चुनी थी।

"हम अब गैर-यूरोपीय टेक कंपनियों के भरोसे अपना भविष्य नहीं छोड़ सकते। हमारा डिजिटल ढांचा सुरक्षित, स्वतंत्र और पूरी तरह हमारे नियंत्रण में होना चाहिए।" — फ्रांसीसी सरकारी प्रवक्ता

निष्कर्ष: फ्रांस का यह कदम वैश्विक स्तर पर एक नई बहस छेड़ सकता है। यह स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में विश्व के प्रमुख देश अपनी डिजिटल सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए 'लोकल टेक' और 'ओपन सोर्स' को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएंगे।

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