'नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी': अरुणाचल पर चीन की 'शरारत' को भारत ने किया सिरे से खारिज

चीन द्वारा हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों, नदियों, दर्रों और बस्तियों के लिए चीनी नाम जारी किए जाने के संदर्भ में MEA ने गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए चीन की इन हरकतों को 'व्यर्थ' और 'बेतुका' करार दिया।

12 Apr 2026  |  10

 

नई दिल्ली: भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों के नाम बदलने के चीन के हालिया प्रयासों पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि पड़ोसी देश द्वारा गढ़े गए 'बेबुनियाद कथानक' और 'फर्जी नामकरण' से यह सच्चाई नहीं बदल सकती कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट हिस्सा है।

कठोर शब्दों में चेतावनी: "रचनात्मक नामकरण व्यर्थ"

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए चीन की इन हरकतों को 'व्यर्थ' और 'बेतुका' करार दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:

"हमने देखा है कि चीन अरुणाचल प्रदेश में जगहों के नामकरण के अपने पुराने और निष्फल प्रयासों को जारी रखे हुए है। क्रिएटिव नामकरण (Creative Naming) इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकता कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।"

चीन की 'नकारात्मक' कूटनीति पर प्रहार

चीन द्वारा हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों, नदियों, दर्रों और बस्तियों के लिए चीनी नाम जारी किए जाने के संदर्भ में MEA ने गंभीर चिंता जताई है। भारत ने चेतावनी दी है कि ऐसी कार्रवाइयां न केवल उकसावे वाली हैं, बल्कि:

यह द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुँचाती हैं।

दोनों देशों के बीच बेहतर समझ विकसित करने की प्रक्रिया को कमजोर करती हैं।

सीमा पर जारी शांति वार्ता और कूटनीतिक माहौल में नकारात्मकता घोलती हैं।

भारत का अडिग और सैद्धांतिक रुख

यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह का कदम उठाया है। भारत ने अतीत में भी ऐसी हरकतों का डटकर मुकाबला किया है। सरकार ने दोहराया कि चीन का अरुणाचल प्रदेश को 'दक्षिण तिब्बत' मानकर दावा करना ऐतिहासिक और भौगोलिक रूप से गलत है।

निष्कर्ष: विदेश मंत्रालय ने जोर दिया कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए दोनों पड़ोसी देशों को ऐसी गतिविधियों से दूर रहना चाहिए जो संबंधों को प्रभावित करें। भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और चीन की किसी भी 'शरारती कोशिश' को बर्दाश्त नहीं करेगा।

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