बंगाल चुनाव में 'मोबाइल किले' की एंट्री: हिंसा रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर से आए बुलेटप्रूफ MBPV वाहन

जम्मू-कश्मीर और मणिपुर से आए अतिरिक्त सुरक्षा बलों के बाद अब घाटी के विशेष मीडियम बुलेटप्रूफ वाहन (MBPV) भी बंगाल पहुँच चुके हैं। कोलकाता और मालदा में इन वाहनों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने का संकेत है।

12 Apr 2026  |  11

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग और सुरक्षा एजेंसियों ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। जम्मू-कश्मीर और मणिपुर से आए अतिरिक्त सुरक्षा बलों के बाद अब घाटी के विशेष मीडियम बुलेटप्रूफ वाहन (MBPV) भी बंगाल पहुँच चुके हैं। कोलकाता और मालदा में इन वाहनों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने का संकेत है।

अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में तैनात होंगे 'सशस्त्र प्रहरी'

जम्मू-कश्मीर की नंबर प्लेट वाले ये वाहन विशेष रूप से उन सीमावर्ती और अतिसंवेदनशील इलाकों में तैनात किए जाएंगे, जहाँ चुनावी हिंसा या उपद्रव की आशंका सबसे अधिक रहती है। ये वाहन सामान्य पुलिस गाड़ियों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तकनीकी रूप से उन्नत हैं।

MBPV की खासियतें: क्यों कहलाते हैं ये 'मोबाइल किला'?

ये मीडियम बुलेटप्रूफ वाहन विशेष रूप से काउंटर-इंसर्जेंसी और हाई-रिस्क ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किए गए हैं। इनकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

बैलिस्टिक सुरक्षा: इसमें मल्टी-लेयर बुलेटप्रूफ आर्मर और हाई-ग्रेड ग्लास लगा है, जो 7.62 मिमी की गोलियों के हमले को नाकाम कर सकता है।

विस्फोट रोधी तकनीक: इसकी अंडरबॉडी और साइड सुरक्षा इतनी मजबूत है कि यह 8 किलोग्राम तक के TNT विस्फोट के असर को भी झेलने में सक्षम है।

360 डिग्री निगरानी: वाहन में नाइट विजन सर्चलाइट और रूफ-माउंटेड गनर स्टेशन हैं, जिससे जवान चलते वाहन से भी दुश्मनों पर नजर रख सकते हैं और जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।

रन-फ्लैट टायर: टायर फटने या गोली लगने की स्थिति में भी ये वाहन कठिन रास्तों पर आसानी से दौड़ सकते हैं।

क्षमता: एक वाहन में चालक दल के साथ 8 से 10 जवान पूरी तरह सुरक्षित रहकर ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि इन उन्नत सैन्य वाहनों को बंगाल चुनाव में उतारना यह स्पष्ट करता है कि सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ये वाहन सुरक्षा बलों को एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करेंगे, जिससे जवानों का मनोबल बढ़ेगा और उपद्रवियों में खौफ पैदा होगा।

मुख्य बिंदु: यह पहली बार है जब बंगाल के विधानसभा चुनावों में इतने बड़े पैमाने पर जम्मू-कश्मीर में इस्तेमाल होने वाले सैन्य स्तर के सुरक्षा उपकरणों और वाहनों का उपयोग किया जा रहा है।

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