नोएडा में श्रमिकों का भीषण आक्रोश: धूं-धूं कर जली गाड़ियां, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ से दहला औद्योगिक क्षेत्र

नोएडा में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों श्रमिकों का गुस्सा बेकाबू हो गया। प्रदर्शनकारी इस कदर आक्रोशित थे कि उन्होंने न केवल निजी कंपनियों की संपत्ति को निशाना बनाया, बल्कि कानून व्यवस्था संभाल रही पुलिस पर भी हमला बोल दिया।

13 Apr 2026  |  8

 

नोएडा | विशेष संवाददाता सप्ताह के पहले ही दिन दिल्ली से सटे औद्योगिक हब नोएडा में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों श्रमिकों का गुस्सा बेकाबू हो गया। देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं।

रणक्षेत्र बना होजरी कॉम्प्लेक्स; पुलिस की गाड़ी फूंकी

सबसे गंभीर स्थिति फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स के पास देखने को मिली। प्रदर्शनकारी इस कदर आक्रोशित थे कि उन्होंने न केवल निजी कंपनियों की संपत्ति को निशाना बनाया, बल्कि कानून व्यवस्था संभाल रही पुलिस पर भी हमला बोल दिया। उपद्रवियों ने पुलिस की एक जीप को पलट दिया और उसमें आग लगा दी। इस दौरान कई अन्य वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया, जिससे आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया।

50 हजार श्रमिक सड़कों पर, ठप हुआ कामकाज

अनुमान के मुताबिक, नोएडा की विभिन्न इकाइयों के लगभग 50 हजार श्रमिक एकजुट होकर सड़कों पर उतरे। भीड़ ने कई कंपनियों के कार्यालयों में पत्थरबाजी की और फर्नीचर व शीशे तोड़ दिए। स्थिति को बिगड़ता देख नोएडा पुलिस प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। आला अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने और श्रमिकों को शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं।

क्यों भड़का श्रमिकों का गुस्सा? (प्रमुख मांगें)

श्रमिकों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी बुनियादी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

वेतन सुरक्षा: न्यूनतम वेतन की गारंटी और समय पर पूर्ण भुगतान।

समान अधिकार: 'समान कार्य-समान वेतन' की नीति लागू करना और ओवरटाइम का दोगुना भुगतान।

सामाजिक सुरक्षा: ईपीएफ (EPF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और गिग श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ।

सुरक्षित वातावरण: सुरक्षित कार्यस्थल, महिला श्रमिकों के लिए विशेष प्रावधान और शोषण पर पूर्ण रोक।

कानूनी मुआवजा: छंटनी की स्थिति में विधिक मुआवजा और उचित नोटिस अवधि।

प्रशासन का पक्ष

बढ़ते तनाव के बीच जिला प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए श्रमिकों को आश्वस्त किया है। उन्होंने कहा:

"प्रशासन श्रमिकों के सभी जायज हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

वर्तमान स्थिति: पूरे क्षेत्र में पुलिस का फ्लैग मार्च जारी है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पीएसी (PAC) की तैनाती कर दी गई है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।

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