हरियाणा : मानवता की मिसाल: सिपाही कुलदीप ने जाते-जाते 5 लोगों को दिया जीवनदान, रोहतक में फिर बना 'ग्रीन कॉरिडोर'

सोनीपत के गोहाना निवासी 51 वर्षीय सिपाही कुलदीप के अंगों ने पांच जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दिया है। मृतक कुलदीप सुनारिया जेल में वार्डन के पद पर तैनात थे और पिछले 11 महीनों से ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे।

13 Apr 2026  |  7

 

रोहतक | मुख्य संवाददाता पंडित भगवत दयाल शर्मा पीजीआईएमएस (PGIMS) रोहतक में मानवता और सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश की गई है, जिसने न केवल पांच परिवारों के बुझते चिरागों को रोशन कर दिया, बल्कि समाज के सामने अंगदान की महत्ता को भी रेखांकित किया है। सोनीपत के गोहाना निवासी 51 वर्षीय सिपाही कुलदीप के अंगों ने पांच जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दिया है।

तीन दिन में दूसरी बार बना 'ग्रीन कॉरिडोर'

पीजीआईएमएस में पिछले तीन दिनों के भीतर यह दूसरा अवसर है जब अंगदान के लिए 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया गया। सोमवार सुबह 4 बजे ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू हुई। अंगों को समय रहते दिल्ली के अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए रोहतक से दिल्ली तक 81 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। इस विशेष मार्ग को महज 50 मिनट में पार किया गया, जिसकी सुरक्षा और सुचारू संचालन के लिए करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात रहे।

इन अंगों का हुआ दान

विभिन्न राज्यों से आई विशेषज्ञों की टीमों ने अंगों को सुरक्षित रिसीव किया:

लीवर: दिल्ली के आईएलबीएस (ILBS) अस्पताल भेजा गया।

किडनी, पैंक्रियाज और कॉर्निया: अन्य जरूरतमंद मरीजों के लिए विभिन्न अस्पतालों में भेजे गए।

संघर्ष के बीच भी अडिग रहा परिवार

मृतक कुलदीप सुनारिया जेल में वार्डन के पद पर तैनात थे और पिछले 11 महीनों से ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी पत्नी प्रमिला ने बताया कि इलाज के दौरान परिवार ने काफी आर्थिक तंगी का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने समाज सेवा के भाव को सर्वोपरि रखा और कुलदीप के 'ब्रेन डेड' घोषित होने के बाद अंगदान का साहसिक फैसला लिया।

"जागरूकता अभियानों का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। तीन दिन में अंगदान का यह दूसरा मामला समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।"

डॉ. एच.के. अग्रवाल, कुलपति, हेल्थ विवि

मुख्य आकर्षण

विवरणजानकारी
दातासिपाही कुलदीप (51 वर्ष), गोहाना
कुल जीवनदान5 मरीजों को
दूरी/समय81 किमी / 50 मिनट
सुरक्षा बल100 पुलिसकर्मी

यह घटना दर्शाती है कि एक व्यक्ति का निर्णय मृत्यु के पश्चात भी कई जिंदगियों में उम्मीद का उजाला भर सकता है। पीजीआई प्रशासन और पुलिस विभाग के समन्वय ने इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाकर एक बार फिर अपनी दक्षता सिद्ध की है।

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