इस्लामाबाद वार्ता विफल: होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की सुगबुगाहट, आर-पार के मूड में ईरान, IRGC ने दी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान की नौसेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। वीडियो के जरिए ईरान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज और हर हलचल पर ईरानी सशस्त्र बलों का पूर्ण नियंत्रण है।

13 Apr 2026  |  4

 

तेहरान/इस्लामाबाद | अंतरराष्ट्रीय डेस्क इस्लामाबाद में आयोजित 'पीस टॉक' के बेनतीजा खत्म होने के बाद खाड़ी देशों में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान की नौसेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्पष्ट कर दिया है कि इस क्षेत्र में 'दुश्मन' की कोई भी हरकत उसके लिए घातक साबित होगी।

ड्रोन फुटेज के साथ दिखाई ताकत

IRGC की नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर होर्मुज जलडमरूमध्य की ड्रोन निगरानी का एक फुटेज जारी किया। इस वीडियो के जरिए ईरान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज और हर हलचल पर ईरानी सशस्त्र बलों का पूर्ण नियंत्रण है। बयान में कहा गया:

"होर्मुज में दुश्मन का कोई भी गलत कदम जानलेवा साबित हो सकता है। हमारी सेना हर सैन्य गतिविधि पर नजर रखे हुए है।"

दावों और पलटवार की जंग

तनाव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उसके दो युद्धपोत— यूएसएस माइकल मर्फी और यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन—होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे और वहां बारूदी सुरंगें हटाने का अभियान शुरू किया।

हालांकि, ईरान के मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' के अनुसार:

अमेरिका का यह कदम केवल एक 'असफल प्रचार स्टंट' था।

अमेरिकी विध्वंसक जहाजों को ईरानी नौसेना की घेराबंदी के बाद पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।

ईरान ने इन जहाजों की मौजूदगी को तेहरान-वाशिंगटन वार्ता के संदर्भ में दबाव बनाने की एक नाकाम कोशिश बताया।

सीजफायर पर टली सहमति

यह सैन्य गतिरोध ऐसे समय में आया है जब करीब एक महीने के भीषण संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के संघर्ष विराम (सीजफायर) की उम्मीद जगी थी। हालांकि, इस्लामाबाद में हुई वार्ता में समझौते की शर्तों पर सहमति नहीं बन सकी।

IRGC का सख्त रुख:

ईरान ने अब आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि किसी भी नाम या बहाने से होर्मुज स्ट्रेट के करीब आने वाले किसी भी सैन्य जहाज को 'संघर्ष विराम का उल्लंघन' माना जाएगा और उसके साथ सैन्य सख्ती से निपटा जाएगा।

रणनीतिक महत्व: क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदु (Oil Transit Point) है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे मार्ग से होकर गुजरता है। यहाँ किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों में भारी उछाल ला सकता है।

वर्तमान स्थिति

पक्षस्टैंड/स्थिति
ईरान (IRGC)होर्मुज पर पूर्ण नियंत्रण का दावा, 'जानलेवा' जवाबी कार्रवाई की चेतावनी।
अमेरिका (CENTCOM)समुद्री मार्ग को सुरक्षित करने और माइन्स हटाने का अभियान जारी रखने का दावा।
वार्ता का परिणामइस्लामाबाद पीस टॉक विफल; शर्तों पर असहमति।

फिलहाल, खाड़ी क्षेत्र में हाई-अलर्ट की स्थिति है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें दोनों महाशक्तियों के अगले कदम पर टिकी हैं।

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