मुंबई/नई दिल्ली | आर्थिक संवाददाता वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद भारतीय बाजारों में हाहाकार मच गया। डॉलर के मुकाबले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल ने शेयर बाजार के निवेशकों का भरोसा हिला दिया है।
रुपया 93 के पार: दो दिन में 80 पैसे से ज्यादा की गिरावट
विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार को रुपये की शुरुआत बेहद कमजोर रही। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत अमेरिकी मुद्रा के दबाव में रुपया 49 पैसे टूटकर 93.32 के स्तर पर पहुंच गया।
लगातार गिरावट: शुक्रवार को रुपया 92.83 पर बंद हुआ था। पिछले दो सत्रों में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 81 पैसे से ज्यादा कमजोर हो चुकी है।
वजह: जानकारों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू बाजार से पैसा निकालने (Outflow) के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है।
कच्चा तेल 100 डॉलर के पार; अमेरिका की नाकेबंदी
शांति वार्ता की विफलता के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने का ऐलान किया है। इस कड़े कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 7.28% उछलकर 102.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका की 'सेंट्रल कमांड' ने स्पष्ट किया है कि ईरानी बंदरगाहों से निकलने वाले जहाजों पर यह नाकेबंदी निष्पक्ष रूप से लागू होगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है।
शेयर बाजार में 'ब्लैक मंडे' जैसा माहौल
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर दिखा। सुबह के कारोबार में चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार धराशायी हो गया:
सेंसेक्स: 1600.73 अंक (2.06%) गिरकर 75,949.52 पर आ गया।
निफ्टी: 468.85 अंक (1.95%) फिसलकर 23,581.75 के स्तर पर पहुंच गया।
अर्थव्यवस्था के लिए 'रेड अलर्ट'
एशियाई विकास बैंक (ADB) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व का यह संघर्ष भारत के मैक्रोइकोनॉमिक प्रदर्शन को तीन तरह से चोट पहुंचा सकता है:
ऊर्जा की कीमतें: कच्चे तेल के महंगे होने से करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ेगा।
व्यापार में बाधा: होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से व्यापार प्रवाह प्रभावित होगा।
रेमिटेंस: खाड़ी देशों से आने वाले धन (Remittance) में कमी आ सकती है।
राहत की बात: भारी उथल-पुथल के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 697.121 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर है। साथ ही, ADB ने चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान जताया है, जो मजबूत घरेलू मांग के कारण 'स्थिर' बनी हुई है।
बाजार की वर्तमान स्थिति (13 अप्रैल 2026)
| सूचकांक/मुद्रा | वर्तमान स्थिति | बदलाव |
|---|---|---|
| रुपया बनाम डॉलर | 93.32 | -49 पैसे |
| ब्रेंट क्रूड | 102.13 USD | +7.28% |
| सेंसेक्स | 75,949.52 | -1600.73 अंक |
| विदेशी मुद्रा भंडार | 697.121 Bn USD | +9.063 Bn |
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निष्कर्ष: विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन भारतीय बाजार के लिए काफी अनिश्चित रहने वाले हैं। यदि तनाव और बढ़ता है, तो रुपये और शेयर बाजार पर इसका नकारात्मक प्रभाव और गहरा सकता है।