भारतीय आईटी सेक्टर का अंत या नई शुरुआत? टीसीएस सीईओ के. कृतिवासन बोले- 'एआई डर नहीं, तरक्की का औजार है'

टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि 2030 तक आईटी सेवाएं खत्म हो जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह विकास का एक नया द्वार खोलने वाला है।

13 Apr 2026  |  2

 

मुंबई | टेक डेस्क क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय आईटी इंडस्ट्री के लिए 'शोक संदेश' साबित होगा? पिछले कुछ समय से विशेषज्ञों के बीच चल रही इस बहस पर देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने विराम लगा दिया है। टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि 2030 तक आईटी सेवाएं खत्म हो जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह विकास का एक नया द्वार खोलने वाला है।

'हर दशक में लिखी जाती है इंडस्ट्री की मौत की खबर'

कृतिवासन ने बेहद बेबाकी से कहा कि पिछले कई दशकों से हर 10 साल में भारतीय आईटी सेक्टर के खत्म होने की भविष्यवाणी की जाती रही है, लेकिन हर बार इस इंडस्ट्री ने अपनी मजबूती और स्किल्स के दम पर वापसी की है। उन्होंने कहा:

"हमारी ताकत सिर्फ कम लागत नहीं, बल्कि हमारे पास मौजूद हुनर की गहराई है। एआई आने से काम खत्म नहीं होगा, बल्कि काम करने का तरीका बदलेगा। क्लाइंट्स को नई तकनीक अपनाने के लिए टीसीएस जैसे अनुभवी पार्टनर की जरूरत पहले से ज्यादा होगी।"

एआई: खतरा नहीं, 2.3 अरब डॉलर का अवसर

कंपनी की सीओओ (COO) आरती सुब्रमण्यम ने बताया कि क्लॉड कोवर्क और मिथोस जैसे एडवांस एआई सिस्टम टीसीएस के लिए बड़े अवसर हैं। एआई की मदद से कोडिंग और प्रोडक्टिविटी में 15% से 30% तक का सुधार देखा गया है।

राजस्व: दिलचस्प बात यह है कि टीसीएस का एआई से होने वाला सालाना रेवेन्यू 2.3 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है।

आधुनिकरण: पुराने पड़ चुके 'लीगेसी सिस्टम' को आधुनिक बनाने में एआई अब कंपनी का सबसे बड़ा हथियार बन रहा है।

चुनौतियों के बीच 'ऑर्डर बुक' ने भरा जोश

भले ही 2004 में लिस्ट होने के बाद पहली बार टीसीएस के सालाना रेवेन्यू में 2.4% की गिरावट दर्ज की गई हो, लेकिन कंपनी का हौसला कम नहीं हुआ है।

मजबूत ऑर्डर बुक: वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के पास 40.7 अरब डॉलर के विशाल ऑर्डर्स मौजूद हैं।

मंदी का मुकाबला: खाड़ी देशों के तनाव और वैश्विक मंदी के बावजूद मेगा डील्स पर हस्ताक्षर होना यह दर्शाता है कि दुनिया का भरोसा भारतीय आईटी पर कायम है।

नौकरियों का संकट टला: नई भर्तियों का दौर शुरू

आईटी सेक्टर में छंटनी की खबरों के बीच टीसीएस ने राहत भरे संकेत दिए हैं। पिछले साल वर्कफोर्स में मामूली कटौती के बाद कंपनी अब विस्तार मोड में है:

बीता साल: वित्त वर्ष 2026 में 44,000 फ्रेशर्स (ट्रेनीज) को नियुक्त किया गया।

भविष्य की योजना: अगले भर्ती चक्र के लिए 25,000 ऑफर पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

निष्कर्ष: टीसीएस के नेतृत्व का यह आत्मविश्वास दर्शाता है कि भारतीय आईटी सेक्टर केवल कोडिंग तक सीमित नहीं है। तकनीक के बदलते स्वरूप के साथ खुद को ढालने की क्षमता ही इस इंडस्ट्री को 2030 और उसके बाद भी वैश्विक स्तर पर 'लीडर' बनाए रखेगी।

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