नई दिल्ली | आर्थिक संवाददाता भारत केवल डेटा खपत के मामले में ही नहीं, बल्कि डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग के मामले में भी अब वैश्विक मानचित्र पर एक 'महाशक्ति' बनकर उभर रहा है। डिजिटल पेमेंट, ओटीटी प्लेटफॉर्म और 5G के विस्तार ने देश में डेटा की भूख को इस कदर बढ़ा दिया है कि भारत अब एशिया-पैसिफिक क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण डेटा हब बनने की राह पर है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डेटा सेंटर मार्केट 2025 के $10 बिलियन से दोगुना होकर 2030 तक $22 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
विदेशी निवेशकों का अटूट भरोसा
'वेस्टियन' (Vestian) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय डेटा सेंटर सेक्टर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
निवेश के आँकड़े: 2020 से 2024 के बीच इस क्षेत्र में लगभग $13 से $15 बिलियन का निवेश आया है।
विदेशी हिस्सेदारी: कुल निवेश का 80 प्रतिशत हिस्सा विदेशी निवेशकों का है, जो भारत की डिजिटल नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर पर उनके मजबूत भरोसे को दर्शाता है।
भविष्य की योजना: अगले पांच वर्षों के लिए $60 से $70 बिलियन के नए निवेश की घोषणा की गई है, जिसमें बड़े हाइपरस्केल ऑपरेटर्स और जॉइंट वेंचर्स की मुख्य भूमिका होगी।
कैपेसिटी में भारी उछाल: 1.6 से 5 गीगावॉट का सफर
भारत अपनी डेटा प्रोसेसिंग क्षमता को युद्धस्तर पर बढ़ा रहा है। वर्तमान में देश की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
मौजूदा क्षमता: फिलहाल 164 सुविधाओं के माध्यम से 1.4 से 1.6 गीगावॉट क्षमता संचालित है।
निर्माणाधीन: 700 मेगावॉट क्षमता पर काम चल रहा है।
लक्ष्य: अनुमान है कि 2026 तक यह क्षमता 2 गीगावॉट और 2030 तक 4 से 5 गीगावॉट तक पहुँच जाएगी।
क्यों बढ़ रही है डेटा की मांग?
भारत में इंटरनेट क्रांति ने डेटा खपत के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस बढ़ती मांग के पीछे तीन प्रमुख कारक हैं:
एआई और क्लाउड: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते इस्तेमाल ने कंपनियों को बड़े डेटा सेंटर्स बनाने पर मजबूर कर दिया है।
प्रति यूजर खपत: भारत में एक औसत यूजर अब हर महीने 25 जीबी से ज्यादा डेटा इस्तेमाल कर रहा है।
डिजिटल इकोसिस्टम: 5G सेवाओं के विस्तार, ऑनलाइन गेमिंग, ओटीटी स्ट्रीमिंग और हर छोटी-बड़ी दुकान पर हो रहे डिजिटल पेमेंट ने डेटा सेंटर्स को 'इकोनॉमी की रीढ़' बना दिया है।
"भारत में डेटा सेंटर का विस्तार केवल ईंट-पत्थर का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, बल्कि यह भविष्य की टेक्नोलॉजी और लाखों नए रोजगार के अवसरों का द्वार है।" — बाजार विशेषज्ञ
निष्कर्ष: भारत जिस गति से डेटा स्टोरेज क्षमताओं का विस्तार कर रहा है, उससे स्पष्ट है कि आने वाले दशक में वैश्विक डेटा प्रोसेसिंग का एक बड़ा हिस्सा भारतीय धरती पर सुरक्षित होगा। यह प्रगति न केवल 'डिजिटल इंडिया' को मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक टेक कंपनियों के लिए भारत को एक अपरिहार्य गंतव्य बना देगी।