IPL 2026: एक नियम, दो मैच और अलग-अलग फैसले! हार्दिक पंड्या को अंपायर ने दी छूट, तो ट्रिस्टन स्टब्स को क्यों रोका?

महज 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग मैचों में एक ही 'नियम उल्लंघन' पर दो अलग-अलग फैसलों ने प्रशंसकों और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीसीसीआई के नियम खिलाड़ियों के रसूख के हिसाब से बदल जाते हैं?

13 Apr 2026  |  4

 

मुंबई | खेल डेस्क आईपीएल 2026 में अंपायरिंग के स्तर और नियमों की एकरूपता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महज 24 घंटे के भीतर दो अलग-अलग मैचों में एक ही 'नियम उल्लंघन' पर दो अलग-अलग फैसलों ने प्रशंसकों और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या बीसीसीआई के नियम खिलाड़ियों के रसूख के हिसाब से बदल जाते हैं?

चेन्नई में 'सख्ती': स्टब्स को अंपायर ने टोका

इस विवाद की शुरुआत 24 घंटे पहले चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के मैच से हुई। दिल्ली की पारी के 19वें ओवर के दौरान बल्लेबाज ट्रिस्टन स्टब्स पसीने के कारण ग्रिप न बनने पर अपने ग्लव्स बदलना चाहते थे। हालांकि, मैदान पर मौजूद चौथे अंपायर (Fourth Amps) ने उन्हें ऐसा करने से साफ मना कर दिया।

नियम का हवाला: अंपायर का तर्क था कि ओवर के बीच में ग्लव्स नहीं बदले जा सकते।

बहस: इस फैसले को लेकर दिल्ली के कोच और नीतीश राणा की अंपायरों से काफी बहस भी हुई, लेकिन अंपायर अपने फैसले पर अडिग रहे।

मुंबई में 'नरमी': हार्दिक पंड्या को खुली छूट?

ठीक 24 घंटे बाद, मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच मुकाबला हुआ। यहाँ मुंबई के कप्तान हार्दिक पंड्या को भी ओवर के बीच में ही ग्लव्स बदलते देखा गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि यहाँ चौथे अंपायर ने उन्हें रोकने की कोई कोशिश नहीं की।

फैंस का सवाल: क्या वानखेड़े में चौथा अंपायर मौजूद नहीं था? या फिर नियम केवल कुछ खिलाड़ियों के लिए ही लागू होते हैं?

क्या कहता है क्रिकेट का नियम? (MCC Laws)

क्रिकेट के नियमों के अनुसार, खेल की गति (Pace of play) बनाए रखने के लिए ओवर के बीच में उपकरण (जैसे ग्लव्स) बदलना वर्जित है।

अपवाद: ग्लव्स केवल तभी बदले जा सकते हैं जब वह पूरी तरह फट गए हों या क्षतिग्रस्त हो गए हों।

अंपायर की भूमिका: इसके लिए भी चौथे अंपायर की अनुमति अनिवार्य है। अगर अंपायर को लगता है कि देरी जायज है, तभी अनुमति दी जाती है। पसीने के कारण ग्लव्स बदलना आमतौर पर 'टाइम वेस्ट' माना जाता है, जिसके लिए ओवर खत्म होने का इंतजार करना पड़ता है।

अंपायरिंग पर उठते सवाल

एक ही टूर्नामेंट में 24 घंटे के भीतर नियमों की यह दोहरी व्याख्या आईपीएल की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।

असमानता: अगर स्टब्स को रोकना सही था, तो हार्दिक को अनुमति क्यों मिली?

समय की बर्बादी: क्या मुंबई इंडियंस के मैच में स्लो ओवर रेट का डर अंपायरों को नहीं था?

चौथे अंपायर की भूमिका: अंपायरों के बीच तालमेल की कमी खिलाड़ियों और कोचों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है।

निष्कर्ष: क्रिकेट के इस महाकुंभ में तकनीक और अंपायरिंग के ऊंचे दावों के बीच इस तरह की विसंगतियां खेल की गरिमा को कम करती हैं। बीसीसीआई और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या नियम वेन्यू और खिलाड़ियों के नाम देखकर बदल दिए जाते हैं।

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