चुनावी दहलीज पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटर लिस्ट से बाहर हुए लोगों को 'अंतरिम वोटिंग' का अधिकार देने से इनकार

शीर्ष अदालत ने उन लाखों मतदाताओं को अंतरिम तौर पर मतदान की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है, जिनके नाम SIR (वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया) के तहत सूची से हटा दिए गए थे और जिनकी अपीलें अभी भी अपीलीय ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं।

13 Apr 2026  |  2

 

नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बिगुल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मतदाता सूची से जुड़े एक संवेदनशील मामले पर अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने उन लाखों मतदाताओं को अंतरिम तौर पर मतदान की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है, जिनके नाम SIR (वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया) के तहत सूची से हटा दिए गए थे और जिनकी अपीलें अभी भी अपीलीय ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं।

'अदालत का दखल नामुमकिन': CJI ने स्पष्ट किया रुख

सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने जोरदार दलील पेश की। उन्होंने कहा कि लगभग 16 लाख अपीलें अभी भी प्रक्रिया में हैं। बनर्जी ने अदालत से गुहार लगाई कि इन लोगों को इसी महीने के अंत में होने वाले दो चरणों के विधानसभा चुनाव में वोट डालने की विशेष अनुमति दी जानी चाहिए।

इन दलीलों को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की:

"इस स्तर पर अंतरिम अधिकार देना बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है। यदि हम इसकी अनुमति देते हैं, तो यह पूरी प्रक्रिया और चुनाव व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।"

34 लाख अपीलों का विशाल डेटा

पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने डेटा का हवाला देते हुए बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, SIR प्रक्रिया के तहत लंबित अपीलों की संख्या 34 लाख तक है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बिना अंतिम सत्यापन के मतदान की अनुमति देना कानूनी और प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की 'फ्रीज'

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने अदालत में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बंगाल की मतदाता सूची को पहले ही फ्रीज (अंतिम रूप) कर दिया गया है।

नियम: चुनाव की तारीखों के इतने करीब होने पर नियमानुसार अब मतदाता सूची में कोई नया नाम नहीं जोड़ा जा सकता।

अदालती निर्देश: आयोग ने साफ किया कि केवल सुप्रीम कोर्ट के विशेष निर्देश पर ही इस सूची में बदलाव संभव था, लेकिन आज की सुनवाई में अदालत ने ऐसा कोई भी निर्देश देने से मना कर दिया।

निष्कर्ष: अब क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए जा चुके हैं और जिनकी सुनवाई लंबित है, वे इस विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। राजनीतिक दलों के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि एक बड़ी आबादी मतदान से वंचित रह जाएगी। अब सबकी निगाहें ट्रिब्यूनलों के अंतिम फैसलों पर टिकी हैं, जो भविष्य के चुनावों के लिए उनकी पात्रता तय करेंगे।

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