वाशिंगटन/इस्लामाबाद | इस्लामाबाद में चली 21 घंटे की मैराथन बैठक के बेनतीजा खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम (Ceasefire) अब समाप्ति की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को चारों तरफ से घेरने की रणनीतिक योजना तैयार कर ली है। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस अब ईरान पर सीमित सैन्य हमले और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थायी नौसैनिक नाकेबंदी पर विचार कर रहा है।
इस्लामाबाद वार्ता: क्यों नहीं बनी बात?
रविवार को पाकिस्तान की राजधानी में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधियों के साथ आमने-सामने बातचीत हुई।
विवाद की जड़: अमेरिका ने मांग की थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करे, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया।
नतीजा: 21 घंटे की चर्चा के बाद भी कोई साझा समझौता नहीं हो सका, जिससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें धुंधली पड़ गई हैं।
ट्रंप का 'प्लान बी': नाकेबंदी और बुनियादी ढांचे पर निशाना
वार्ता विफल होते ही ट्रंप प्रशासन ने अपनी आक्रामक रणनीति को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी: राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश दे दिया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य "ईरानी ब्लैकमेलिंग" को समाप्त करना है।
सीमित सैन्य हमला: ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में स्पष्ट चेतावनी दी कि उनके लिए ईरान के पावर प्लांट और संयंत्रों पर हमला करना "बहुत आसान" है। उन्होंने कहा, "मैं ऐसा करना नहीं चाहता, लेकिन उनके पास विकल्प सीमित हैं।"
क्षेत्रीय अस्थिरता का डर और ट्रंप की अनिच्छा
हालांकि ट्रंप ने हमले की धमकी दी है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का यह भी मानना है कि बड़े सैन्य अभियान की संभावना कम है। इसकी वजहें निम्नलिखित हैं:
अस्थिरता: सीधे हमले से पूरा मध्य पूर्व युद्ध की आग में झुलस सकता है।
ट्रंप की नीति: राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि वे विदेशों में लंबे और खर्चीले सैन्य अभियानों में अमेरिकी सेना को नहीं उलझाना चाहते।
"राष्ट्रपति ने होर्मुज पर नौसैनिक नाकेबंदी का आदेश देकर ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने का फैसला किया है, साथ ही वे अन्य सभी सैन्य विकल्पों को भी खुला रखे हुए हैं।" — ओलिविया वेल्स, प्रवक्ता, व्हाइट हाउस
निष्कर्ष
अमेरिका अब 'प्रेशर टैक्टिक्स' (दबाव की राजनीति) के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल व्यापार गुजरता है, वहां अमेरिकी कब्जे की योजना ने वैश्विक तेल बाजारों में भी खलबली मचा दी है। यदि अगले कुछ दिनों में कोई नया कूटनीतिक रास्ता नहीं निकला, तो दुनिया एक और भीषण संघर्ष की गवाह बन सकती है।