नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक अस्थिरता के बीच रेटिंग एजेंसी एसएंडपी (S&P) ग्लोबल रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। एजेंसी का मानना है कि हालांकि भारत कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से पूरी तरह अछूता नहीं है, लेकिन देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद और पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार इस दबाव को सहने में सक्षम हैं।
क्रूड का 'शॉक': ₹130 डॉलर प्रति बैरल का खतरा
एसएंडपी ने तनावपूर्ण स्थितियों (Stress Scenario) के आधार पर कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाया है:
अनुमान: 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है, जबकि 2027 में इसके 100 डॉलर रहने के आसार हैं।
विकास दर पर असर: यदि कीमतें 130 डॉलर के स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट में 0.80% तक की गिरावट आ सकती है।
कंपनियों पर प्रभाव: वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनियों की आय (EBITDA) में 15-25% की कमी हो सकती है, जिससे उन पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
बैंकिंग सेक्टर: चुनौतियों के बीच मजबूती
रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा संकट का असर बैंकों की एसेट क्वालिटी पर भी पड़ सकता है:
NPA का खतरा: बैंकों का एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) बढ़कर 3.5% तक पहुंच सकता है।
राहत की बात: पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने अपनी पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट लोन की गुणवत्ता में सुधार किया है, जिससे वे इस झटके को झेलने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।
क्यों सुरक्षित है भारत? ये हैं 'ढाल' के 3 बड़े कारण
एसएंडपी ने उन कारणों को रेखांकित किया है जो भारत को अन्य देशों की तुलना में कम प्रभावित होने में मदद करेंगे:
मजबूत बाह्य स्थिति: भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जो आयात बिल बढ़ने पर रुपये की विनिमय दर को स्थिरता प्रदान करेगा।
घरेलू मांग: भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग और कम मुद्रास्फीति (Inflation) के साथ 2026 में प्रवेश कर रही है।
कॉरपोरेट बैलेंस शीट: भारतीय कंपनियों का बही-खाता पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है, जो बढ़ती लागत के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करेगा।
इन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा दबाव
एजेंसी ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की वृद्धि चालू खाते के घाटे (CAD) को जीडीपी के 0.4% तक बढ़ा सकती है। सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्र हैं:
रसायन और रिफाइनिंग
विमानन (Aviation)
पेट्रोकेमिकल्स
इसके विपरीत, बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और जन-केंद्रित क्षेत्रों के अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद जताई गई है।
निष्कर्ष: रेटिंग पर तत्काल खतरा नहीं
एसएंडपी का मानना है कि भारत की संप्रभु (Sovereign) रेटिंग पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है। हालांकि, लंबे समय तक चलने वाला ऊर्जा संकट राजकोषीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। रिपोर्ट का सार यही है कि भारत के पास इस वैश्विक चक्रवात से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन और मजबूत 'फाइनेंशियल फाउंडेशन' मौजूद है।