नई दिल्ली: भारत की अग्रणी फिनटेक कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पेटीएम) ने कॉरपोरेट स्वामित्व के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मार्च 2026 के अंत तक पेटीएम अब 'बहुलांश भारतीय स्वामित्व' (Majority Indian-Owned) वाली कंपनी बन गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, कंपनी में भारतीय निवेशकों की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 50.3 प्रतिशत हो गई है, जो इसके भविष्य और स्थिरता पर घरेलू निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
विदेशी पोर्टफोलियो से घरेलू हाथों में कमान
पिछले कुछ समय में पेटीएम के शेयरहोल्डिंग पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहाँ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने अपनी हिस्सेदारी में कटौती की है, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों ने इसे हाथों-हाथ लिया है। नियामकीय सूचना के मुताबिक, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की हिस्सेदारी मार्च तिमाही में रिकॉर्ड 23.1 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह पिछले साल की तुलना में 9.1 प्रतिशत अंक की प्रभावशाली वृद्धि है।
म्यूचुअल फंड्स और बीमा कंपनियों का बढ़ता भरोसा
भारतीय बाजार के इस 'स्वदेशीकरण' में म्यूचुअल फंड कंपनियों ने अग्रणी भूमिका निभाई है:
म्यूचुअल फंड्स: इनकी हिस्सेदारी 14.3% से बढ़कर 16.6% हो गई है। निवेश करने वाले फंड्स की संख्या भी 36 से बढ़कर 41 हो गई है।
बीमा क्षेत्र: टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस जैसे दिग्गजों ने भी अपना निवेश बढ़ाया है, जिससे बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी अब 5.1% हो गई है।
वित्तीय सेहत में सुधार: मुनाफे की हैट्रिक
स्वामित्व के साथ-साथ कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी जबरदस्त सुधार हुआ है। दिसंबर तिमाही के नतीजों ने बाजार को उत्साहित किया है:
लगातार तीसरा मुनाफा: कंपनी ने 225 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया।
राजस्व वृद्धि: राजस्व 20% की बढ़त के साथ 2,194 करोड़ रुपये रहा।
व्यापारी आधार: पेटीएम से जुड़े मर्चेंट्स की संख्या 24% बढ़कर 1.44 करोड़ के पार पहुँच गई है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने पेटीएम की इस नई दिशा की सराहना की है:
बैंक ऑफ अमेरिका: रिपोर्ट के अनुसार, पेटीएम मर्चेंट पेमेंट और ऋण जैसे उच्च राजस्व वाले क्षेत्रों में बेहद मजबूत स्थिति में है। विविध बिजनेस मॉडल के कारण कंपनी के मार्जिन में सुधार हो रहा है।
बर्नस्टीन: विशेषज्ञों का मानना है कि पेटीएम की मर्चेंट आय अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लगभग दोगुनी है और इसकी लाभप्रदता का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर जा रहा है।
निष्कर्ष: भारतीय निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी और लगातार सुधरते वित्तीय नतीजे बताते हैं कि पेटीएम न केवल एक डिजिटल भुगतान मंच है, बल्कि अब भारतीय वित्तीय बाजार का एक सशक्त 'स्वदेशी' स्तंभ बनकर उभर रहा है।