6 अप्रैल की वह रात्रि, जब घड़ी की सुइयां 9.41 का अंक स्पर्श कर रही थीं, भारत के डिजिटल पटल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक संदेश प्रतिध्वनित हुआ। वह संदेश केवल शब्दों का समूह नहीं था, बल्कि भारत के असैन्य परमाणु सफर की उस महती सफलता का आधिकारिक प्रतिवेदन था, जिसने विश्व के परमाणु मानचित्र को सदैव के लिए परिवर्तित कर दिया। 'भारत के लिए गर्व का पल' - इन शब्दों के पीछे छिपी थी कलपक्कम के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की दशकों की साधना। तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित स्वदेशी 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' ने 'क्रिटिकैलिटी' हासिल कर ली थी। यह उस धुरंधर शक्ति का अभ्युदय था, जिसका स्वप्न स्वतंत्र भारत के प्रथम नेतृत्व ने सात दशक पूर्व देखा था।
भाभा का विजन: पराधीनता से आत्मनिर्भरता तक
भारत के परमाणु कार्यक्रम की जड़ें 1954 के उस कालखंड में निहित हैं, जब परमाणु विज्ञान के पुरोधा होमी जहांगीर भाभा ने तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रूपरेखा गढ़ी थी। भारत की भौगोलिक विवशता यह थी कि यहाँ यूरेनियम का भंडार वैश्विक संपदा का मात्र 2 प्रतिशत था, किंतु थोरियम के मामले में विधाता ने भारत पर विशेष अनुकंपा की थी - विश्व का 25 प्रतिशत थोरियम भंडार भारत की कोख में सुरक्षित है। भाभा का तर्क स्पष्ट था: यदि भारत को अपनी बढ़ती जनसंख्या और प्रगाढ़ होती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संप्रभुता प्राप्त करनी है, तो उसे यूरेनियम की पराधीनता त्यागकर थोरियम की अनंत ऊर्जा को अपनाना होगा। कलपक्कम की यह सफलता उसी 'द्वितीय सोपान' (स्टेज 2) का साकार रूप है, जो भारत को थोरियम आधारित भविष्य (स्टेज 3) की ओर अग्रसर करती है।
थोरियम का रहस्यमयी रूपांतरण
भारत के पास लगभग 4 लाख टन थोरियम का विशाल भंडार है। तकनीकी दृष्टि से थोरियम स्वयं 'विखंडनीय' (Fissile) नहीं होता, अर्थात न्यूट्रॉन के टकराने से यह सीधे ऊर्जा उत्पन्न नहीं करता। किंतु, विज्ञान की जादुई प्रक्रिया के अंतर्गत जब इसे रिएक्टर में रखा जाता है, तो यह 'यूरेनियम-233' में रूपांतरित हो जाता है। यही यूरेनियम-233 वह ईंधन है, जो भारत की शताब्दियों की ऊर्जा पिपासा को शांत करने की सामर्थ्य रखता है।
परमाणु ऊर्जा का त्रिपक्षीय सोपान
भारत का परमाणु मार्ग तीन अत्यंत जटिल चरणों से होकर गुजरता है:
1. प्रथम चरण: 'प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर' में प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग कर ऊर्जा और उप-उत्पाद के रूप में प्लूटोनियम-239 प्राप्त करना।
2. द्वितीय चरण: प्राप्त प्लूटोनियम का उपयोग 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (फास्ट ब्रीडर रिएक्टर) में करना। यहाँ चमत्कार यह होता है कि रिएक्टर अपनी खपत से अधिक ईंधन (प्लूटोनियम) पैदा करता है और साथ ही थोरियम को विखंडनीय यूरेनियम-233 में परिवर्तित करता है।
3. तृतीय चरण: पूर्णतः थोरियम आधारित रिएक्टर, जो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व का अधिनायक बना देंगे।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर: अक्षय ऊर्जा का स्रोत
कलपक्कम का 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक (एमडब्ल्यूई) का यह रिएक्टर तकनीकी विशिष्टता का शिखर है। इसे 'भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड' (भाविनी) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी 'ब्रीडिंग' क्षमता है - यह जलने के साथ-साथ नया ईंधन भी सृजित करता है। इस उपलब्धि के साथ ही भारत रूस के पश्चात विश्व का दूसरा ऐसा राष्ट्र बन गया है जिसके पास वाणिज्यिक स्तर का 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' कार्यरत है। यह 'मेक इन इंडिया' का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें 200 से अधिक भारतीय उद्योगों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसएमई) का पसीना सम्मिलित है।
क्रिटिकैलिटी: परमाणु हृदय की धड़कन
विज्ञान की भाषा में 'क्रिटिकैलिटी' प्राप्त करने का अर्थ है वह बिंदु, जहां रिएक्टर के भीतर परमाणु विखंडन की श्रृंखला प्रतिक्रिया स्व-संचालित और स्थिर हो जाती है। अब इस रिएक्टर को बाहरी न्यूट्रॉन स्रोत की आवश्यकता नहीं है। यह एक ऐसी सिम्फनी की भांति है, जहां नष्ट होने वाले और उत्पन्न होने वाले न्यूट्रॉनों के मध्य एक दिव्य संतुलन स्थापित हो चुका है। यह स्थिरता स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा का आधार है।
सुरक्षा और भविष्य की पदचाप
कलपक्कम का यह रिएक्टर सुरक्षा के अभेद्य मानकों से सुसज्जित है। किसी भी आकस्मिक विपत्ति की स्थिति में, यह तंत्र स्वतः ही निष्क्रिय होने की क्षमता रखता है। यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन के चारों ओर यूरेनियम-238 की परत और भविष्य में थोरियम-232 का उपयोग भारत को 'ऊर्जा-अकाल' से सदैव के लिए मुक्त कर देगा।
नया भारत, नई शक्ति
अमेरिका और ईरान के मध्य जारी सामरिक संघर्षों के कोलाहल के बीच, भारत ने निःशब्द भाव से अपनी ऊर्जा सुरक्षा के दुर्ग को सुदृढ़ कर लिया है। कलपक्कम की यह सफलता केवल बिजली पैदा करने की मशीन मात्र नहीं है, बल्कि यह उस आत्मविश्वास का परिचायक है जो आधुनिक भारत की रगों में दौड़ रहा है। हम अब उस मुहाने पर खड़े हैं, जहां से भारत का परमाणु सूर्योदय समूचे विश्व को अपनी वैज्ञानिक आभा से आलोकित करेगा।
थोरियम का शंखनाद
कलपक्कम की धरा से उठा परमाणु ऊर्जा का नया स्वर भारत को ऊर्जा संप्रभुता के शिखर की ओर ले जा रहा है। स्वदेशी 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' की सफलता मात्र एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत के 'अजेय' होने का उद्घोष है।
15 Apr 2026
|
100
अन्य खबरें
संपादकीय- डिजिटल नियंत्रण ढांचाः चुप्पी की ओर बढ़ता लोकतंत्र
15 Apr 2026 119
शब्दचित्रः नियति का शंखनाद
15 Apr 2026 125
इस्लामाबाद में कूटनीति की अंत्येष्टिः सुलगता सन्नाटा
15 Apr 2026 113
रसोई का संकट
15 Apr 2026 217
आवरणकथा- सत्ता संग्राम
15 Apr 2026 127
लाल अंतः बंदूकों के बाद का सवाल
15 Apr 2026 92
रॉकेट फोर्स: युद्ध का नया व्याकरण
15 Apr 2026 97
डिजिटल विद्रूपता का नया युग
15 Apr 2026 96
बिहार में नया ‘सम्राट’
15 Apr 2026 89
आकाश की विवशता
15 Apr 2026 110
अंबर के आलिंगन का महाअभ्यास
15 Apr 2026 85
अदृश्य आकाश, रक्तरंजित अरण्य
15 Apr 2026 98
असफल शांति, बढ़ता युद्ध
12 Apr 2026 114
साइना नेहवालः जिद, युग, विरासत
16 Feb 2026 405
SHANTI: भविष्य का आधार
16 Feb 2026 359