हरियाणा : रिंग में 'नायब सूबेदार' प्रीति का स्वर्णिम पंच: एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में जीता गोल्ड, सेना प्रमुख ने किया सम्मानित

आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 के 54 किलोग्राम भार वर्ग में प्रीति ने स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराया। भारतीय सेना में नायब सूबेदार का पद संभालने के बाद यह उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी, जिसमें उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

19 Apr 2026  |  21

 

नई दिल्ली/भिवानी: हरियाणा के भिवानी की 'गोल्डन गर्ल' प्रीति पंवार ने मुक्केबाजी की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। मंगोलिया में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 के 54 किलोग्राम भार वर्ग में प्रीति ने स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराया। भारतीय सेना में नायब सूबेदार का पद संभालने के बाद यह उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी, जिसमें उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

थल सेना प्रमुख ने थपथपाई पीठ

प्रीति की इस शानदार उपलब्धि पर भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। सेना प्रमुख ने न केवल प्रीति के साहस की प्रशंसा की, बल्कि टीम के कोच सूबेदार मोहम्मद ऐतेशामुद्दीन को भी उनके उत्कृष्ट मार्गदर्शन के लिए सम्मानित किया। पदक विजेता मुक्केबाज को प्रोत्साहन स्वरूप 75,000 रुपये की सम्मान राशि भी भेंट की गई।

चाचा से मिली प्रेरणा, परिवार ने दी सपनों को उड़ान

भिवानी के गांव बड़ेसरा की रहने वाली प्रीति की इस सफलता की नींव साल 2017 में रखी गई थी।

शुरुआत: आठवीं कक्षा में अपने चाचा और कोच विनोद पंवार से प्रेरित होकर उन्होंने ग्लव्स थामे।

पारिवारिक सहयोग: पिता सोमबीर सिंह (हरियाणा पुलिस में ASI) और मां सलीन देवी ने बेटी के सपनों के लिए अपना ठिकाना बदला और महम शिफ्ट हो गए।

कठिन तपस्या: प्रीति रोजाना सुबह-शाम करीब 5 घंटे रिंग में पसीना बहाती हैं। उनकी तकनीक और अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

मिशन 2026: कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स पर नजर

एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने के बाद प्रीति के हौसले बुलंद हैं। अब उनका अगला लक्ष्य और भी बड़ा है:

जुलाई 2026: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स

आगामी लक्ष्य: जापान में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स

"प्रीति पंवार ने साबित कर दिया है कि यदि जुनून और कड़ी मेहनत का साथ हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। उनकी यह जीत पूरे भिवानी और देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।" — राजनारायण पंघाल, खेल प्रेरक व अधिवक्ता

प्रीति पंवार की यह उपलब्धि न केवल भारतीय सेना के खेल कोटे की सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि भारतीय नारी शक्ति अब अंतरराष्ट्रीय रिंग में 'नॉकआउट' पंच लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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