सरकार का उद्देश्य पेंशन क्षेत्र को बीमा क्षेत्र (Insurance Sector) के समकक्ष लाना है। पिछले वर्ष बीमा क्षेत्र में भी FDI की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% कर दिया गया था।
1. प्रमुख विधायी बदलाव
मानसून सत्र में बिल: सरकार 'पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) अधिनियम, 2013' में संशोधन के लिए आगामी सत्र में विधेयक पेश कर सकती है।
FDI सीमा में वृद्धि: वर्तमान में पेंशन फंड में केवल 49% FDI की अनुमति है, जिसे बढ़ाकर 100% करने का विचार है।
2. NPS ट्रस्ट का पृथक्करण (Separation)
संशोधन बिल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा NPS ट्रस्ट को रेगुलेटर (PFRDA) से अलग करना है:
नया ढांचा: NPS ट्रस्ट अब किसी चैरिटेबल ट्रस्ट या कंपनी अधिनियम के दायरे में आ सकता है।
प्रबंधन: इसका प्रबंधन 15 सदस्यों वाले एक सक्षम बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिसमें अधिकांश सदस्य सरकारी होंगे क्योंकि राज्यों और केंद्र सरकार का इस कॉर्पस में सबसे बड़ा योगदान है।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS): एक परिचय
भारत सरकार ने वित्तीय बोझ को कम करने और पेंशन प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर NPS की शुरुआत की थी।
NPS का इतिहास और विकास
शुरुआत: 1 जनवरी, 2004 से केंद्र सरकार के सभी नए कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए इसे अनिवार्य किया गया।
सार्वभौमिक विस्तार: 1 मई, 2009 से इसे देश के सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक आधार पर खोल दिया गया।
उद्देश्य: 'डिफाइंड बेनिफिट' (निश्चित पेंशन) से हटकर 'डिफाइंड कंट्रीब्यूशन' (अंशदान आधारित) प्रणाली को अपनाना, ताकि सरकारी संसाधनों का उपयोग सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए किया जा सके।
बीमा क्षेत्र में FDI का सफर (तुलनात्मक)
| वर्ष | FDI सीमा |
|---|---|
| 2015 से पहले | 26% |
| 2015 संशोधन | 49% |
| 2021 संशोधन | 74% |
| वर्तमान प्रस्ताव | 100% |
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निष्कर्ष: पेंशन सेक्टर में 100% FDI की अनुमति मिलने से लंबी अवधि के निवेश (Long-term Capital) को बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्राहकों को अधिक विकल्प, कम सेवा शुल्क और बेहतर डिजिटल अनुभव मिलने की उम्मीद है।