रुपये में सुधार के बाद RBI के कड़े तेवर नरम: विदेशी मुद्रा डीलरों पर लगे प्रतिबंध हटाए, बाजार में लौटेगी रौनक

केंद्रीय बैंक के इस फैसले से विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता (Liquidity) बढ़ने की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय रुपये की विनिमय दर में आई स्थिरता को देखते हुए विदेशी मुद्रा डीलरों (फॉरेक्स डीलर्स) पर लगाए गए कई कड़े प्रतिबंधों को वापस लेने का निर्णय लिया है।

21 Apr 2026  |  24

 

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय रुपये की विनिमय दर में आई स्थिरता को देखते हुए विदेशी मुद्रा डीलरों (फॉरेक्स डीलर्स) पर लगाए गए कई कड़े प्रतिबंधों को वापस लेने का निर्णय लिया है। 20 अप्रैल को जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब अधिकृत डीलर ऑफशोर नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड मार्केट (NDF) में पुनः अपनी पोजीशन ले सकेंगे।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में संकेत दिया था कि ये पाबंदियां केवल अस्थायी थीं, जिन्हें अब बाजार की स्थिति सुधरने पर हटा लिया गया है।

प्रमुख बदलाव: डीलर्स को मिली बड़ी राहत

केंद्रीय बैंक के इस फैसले से विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता (Liquidity) बढ़ने की उम्मीद है। मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:

डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स: अब बैंकों को रेजिडेंट या नॉन-रेजिडेंट यूजर्स को रुपये से जुड़े नॉन-डेलिवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर करने की पूरी छूट होगी।

रीबुकिंग की अनुमति: बैंक अब यूजर्स को फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक (Rebook) करने की अनुमति दे सकेंगे। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

पोजीशन की सीमा: बैंकों को प्रत्येक कारोबारी दिन के अंत में ऑनशोर डेलिवरेबल मार्केट में अपनी नेट ओपन पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर तक सीमित रखना होगा।

क्यों लगाई गई थी पाबंदी? (फ्लैशबैक)

मार्च 2026 के अंत में जब अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई थीं, तब रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तर की ओर गिर रहा था।

रुपया डॉलर के मुकाबले 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक जा गिरा था।

सट्टेबाजी को रोकने के लिए आरबीआई ने बैंकों को ऑफशोर मार्केट में पोजीशन लेने से रोक दिया था।

इस सख्ती का परिणाम यह रहा कि 10 अप्रैल तक बैंकों ने लगभग 40 बिलियन डॉलर के सट्टा ट्रेड को बाजार से खत्म कर दिया, जिससे रुपये को संभलने में मदद मिली।

क्या होता है NDF मार्केट?

नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) एक ऐसा विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है जिसका उपयोग उन मुद्राओं के लिए किया जाता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह से परिवर्तनीय (Convertible) नहीं हैं। इसमें व्यापार के अंत में वास्तविक मुद्रा का आदान-प्रदान नहीं होता, बल्कि केवल नकद (कैश) अंतर का निपटान किया जाता है।

भविष्य की रणनीति: रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण

आरबीआई का यह कदम स्पष्ट करता है कि केंद्रीय बैंक भारतीय मुद्रा के अंतरराष्ट्रीयकरण (Internationalization) और वित्तीय बाजारों को अधिक गहरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। संबंधित पक्षों (Related Parties) के लिए कुछ नियमों को बरकरार रखा गया है, लेकिन सामान्य डीलर्स के लिए रास्ते खोल दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा और मजबूत होगा।

अन्य खबरें