काठमांडू | नेपाल की राजनीति में एक बार फिर भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के गठन को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की नींव हिला दी है। काठमांडू के हृदय स्थल से लेकर प्रशासनिक केंद्र 'सिंह दरबार' तक, आक्रोशित जनता और छात्र संगठनों का कब्जा है। सरकार के कुछ विवादित फैसलों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने इस असंतोष की आग में घी का काम किया है।
भारत से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी: सीमावर्ती इलाकों में भारी रोष
विरोध की सबसे बड़ी वजह सरकार का वह फैसला है, जिसके तहत भारत से आने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य कर दी गई है।
प्रभाव: नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लाखों नागरिक अपनी रोजमर्रा की जरूरतों (चीनी, नमक, तेल आदि) के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं।
जनता का तर्क: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया है। यह फैसला गरीब और मध्यम वर्ग पर सीधा आर्थिक बोझ डालता है, जिससे दैनिक जीवन दूभर हो गया है।
छात्रों का 'शक्ति प्रदर्शन': दमनकारी नीतियों के खिलाफ मोर्चा
सरकार और छात्र संगठनों के बीच ठन गई है। बालेन सरकार पर आरोप है कि वह राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संघों के वजूद को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
व्यापक आंदोलन: देशभर में हजारों छात्र स्कूल और कॉलेज यूनिफॉर्म में सड़कों पर उतर आए हैं।
नारेबाजी: छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार संवाद के बजाय 'दमन' का रास्ता अपना रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गृह मंत्री सुदान गुरूंग पर भ्रष्टाचार के आरोप: इस्तीफे की मांग तेज
सरकार की मुश्किलों में सबसे बड़ा इजाफा गृह मंत्री सुदान गुरूंग पर लगे संगीन आरोपों ने किया है।
आय से अधिक संपत्ति: विपक्ष और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गुरूंग संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और विवादित व्यापारियों के साथ सांठगांठ में लिप्त हैं।
मीडिया रिपोर्ट: नेपाली मीडिया में कुछ ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं, जिनसे गृह मंत्री की भूमिका पर सवालिया निशान लग गए हैं। अब देशभर में उनके तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर रैलियां निकाली जा रही हैं।
प्रशासनिक केंद्र 'सिंह दरबार' तक पहुंचा असंतोष
नेपाल का मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय, सिंह दरबार, अब प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गया है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक विवादित नीतियां वापस नहीं ली जातीं और भ्रष्ट मंत्रियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि: "बालेन शाह के लिए यह अग्निपरीक्षा का समय है। यदि उन्होंने समय रहते जनता और छात्र संगठनों के साथ संवाद स्थापित नहीं किया, तो यह अल्पमत सरकार के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।"
नेपाल के कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस बल तैनात है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का हौसला कम होता नहीं दिख रहा है।