भोपाल | मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के विकास और किसानों की समृद्धि के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक युगांतकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब प्रदेश में किसी भी विकास परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) किए जाने पर किसानों को उनकी जमीन की गाइडलाइन वैल्यू का चार गुना भुगतान किया जाएगा।
मुआवजे का गणित: फैक्टर 1 से बढ़कर हुआ 2
मुख्यमंत्री ने भू-अर्जन मुआवजे के 'फैक्टर' में बड़ा बदलाव करते हुए इसे 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया है।
पुरानी व्यवस्था: वर्ष 2014 से लागू नियमों के अनुसार, फैक्टर-1 के तहत किसानों को गाइडलाइन दर का दोगुना मुआवजा मिलता था।
नई व्यवस्था: अब फैक्टर-2 लागू होने से मुआवजा सीधे दोगुना होकर गाइडलाइन रेट का 4 गुना हो जाएगा।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
सीएम डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं केवल इसलिए वर्षों से लंबित थीं क्योंकि भूमि अधिग्रहण में मुआवजे को लेकर विवाद था।
वाजिब दाम का अभाव: जमीन की सरकारी गाइडलाइन दरें अक्सर बाजार मूल्य से कम होती हैं, जिससे किसानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहा था।
विकास को गति: प्रदेश में हर साल सड़क, रेलवे, सिंचाई और बुनियादी ढांचे के लिए लगभग 70,000 से 75,000 करोड़ रुपये का निवेश होता है। मुआवजे की राशि बढ़ने से अब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया निर्बाध और तेज होगी।
समिति की सिफारिश पर लगी मुहर
इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया था। समिति ने फिक्की, क्रेडाई और किसान संघों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा के बाद फैक्टर को बढ़ाने की अनुशंसा की थी।
किसानों के खाते में आएगी बड़ी रकम
नई व्यवस्था के लागू होने से मुआवजे के बजट में भारी बढ़ोतरी होगी:
लोक निर्माण विभाग: पिछले 3 वर्षों में दिए गए 10 हजार करोड़ के मुआवजे के मुकाबले अब यह राशि 20 हजार करोड़ तक पहुंच जाएगी।
जल संसाधन विभाग: नर्मदा घाटी विकास और सिंचाई परियोजनाओं के लिए तय 1 हजार करोड़ की राशि अब दोगुनी (2 हजार करोड़) होकर सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगी।
कानूनी आधार और पारदर्शिता
सरकार ने 'मध्य प्रदेश भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013' के तहत यह बदलाव किया है। इसका उद्देश्य न केवल उचित मुआवजा देना है, बल्कि विस्थापितों के पुनर्वास में पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी है।
"विकास के लिए भूमि अधिग्रहण पर बड़े फैसले जरूरी हैं। हम विकास में किसानों को बाधा नहीं, बल्कि सहभागी बना रहे हैं। यह निर्णय केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अन्नदाता के सम्मान का संकल्प है।" — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश
निष्कर्ष
इस फैसले से मध्यप्रदेश में लंबित पड़े एक्सप्रेस-वे, सिंचाई बांधों और औद्योगिक गलियारों के निर्माण को नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही, अपनी जमीन देने वाले किसानों को अब एक सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होगी, जो उन्हें समृद्ध बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
एक प्रासंगिक प्रश्न: क्या आप अपनी किसी विशिष्ट जमीन या क्षेत्र के लिए इस नए 'फैक्टर-2' के आधार पर संभावित मुआवजे की गणना के तरीके के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे?