पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹28 की वृद्धि महज अफवाह: पेट्रोलियम मंत्रालय ने खारिज की खबरें, कहा– 'दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं'

पेट्रोलियम मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि चुनाव के बाद ईंधन के दाम ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत संभवतः दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश है, जहाँ पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं होने दी गई है।

23 Apr 2026  |  4

 

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि चुनाव के बाद ईंधन के दाम ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं।

भ्रामक रिपोर्टों पर मंत्रालय का कड़ा रुख

हाल ही में 'कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज' की एक रिपोर्ट के हवाले से यह दावा किया जा रहा था कि तेल कंपनियां अपना घाटा पूरा करने के लिए कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करेंगी।

पैनिक फैलाने की कोशिश: मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी खबरें केवल जनता के बीच डर और घबराहट पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं।

ऐतिहासिक स्थिरता: सरकार का कहना है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत संभवतः दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश है, जहाँ पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं होने दी गई है।

क्यों और कैसे तय होती हैं तेल की कीमतें?

आम जनता के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर पेट्रोल-डीजल के दाम तय कैसे होते हैं? मंत्रालय ने इसके पीछे के मुख्य कारकों को साझा किया है:

अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल (Crude Oil): चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतों का सीधा असर घरेलू दामों पर पड़ता है।

डॉलर बनाम रुपया: कच्चे तेल का भुगतान डॉलर में होता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो तेल का आयात महंगा हो जाता है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

टैक्स संरचना (Excise & VAT): केंद्र सरकार द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT) कुल कीमत का एक बड़ा हिस्सा होता है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग होती हैं।

रिफाइनिंग और लॉजिस्टिक्स: कच्चे तेल को साफ करने (रिफाइनिंग) का खर्च और उसे देश भर के पंपों तक पहुँचाने की लागत भी अंतिम कीमत में जोड़ी जाती है।

सरकार का दावा: जनता को राहत प्राथमिकता

मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने सरकार के निर्देश पर कीमतों को स्थिर रखा है। सरकार का उद्देश्य है कि वैश्विक संकट का बोझ सीधा आम आदमी की जेब पर न पड़े।

मंत्रालय का संदेश: "सरकार के पास फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। नागरिक ऐसी अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।"

नोट: मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार और तेल कंपनियां मिलकर स्थिति की निगरानी कर रही हैं ताकि आपूर्ति शृंखला सुचारू बनी रहे और कीमतों में स्थिरता बनी रहे।

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