भारत-जमनी का 'महा-समझौता': 8 अरब डॉलर की सबमरीन डील तय, हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीन दिवसीय जर्मनी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 8 अरब डॉलर (लगभग 75,272 करोड़ रुपये) के मेगा सबमरीन प्रोजेक्ट पर अंतिम सहमति बन गई है। जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कील शहर में राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद पुष्टि की कि अगले तीन महीनों के भीतर इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।

23 Apr 2026  |  2

भारत-जमनी का 'महा-समझौता': 8 अरब डॉलर की सबमरीन डील तय, हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत

बर्लिन/नई दिल्ली: भारत और जर्मनी के रक्षा संबंधों में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीन दिवसीय जर्मनी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 8 अरब डॉलर (लगभग 75,272 करोड़ रुपये) के मेगा सबमरीन प्रोजेक्ट पर अंतिम सहमति बन गई है। इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील्स में से एक माना जा रहा है।

90 दिनों में फाइनल मुहर: जर्मनी पहली बार देगा अपनी 'सीक्रेट' तकनीक

जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कील शहर में राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद पुष्टि की कि अगले तीन महीनों के भीतर इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे।

तकनीकी हस्तांतरण (ToT): इस डील की सबसे खास बात यह है कि जर्मनी पहली बार अपनी अत्याधुनिक सबमरीन प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी किसी गैर-यूरोपीय देश को ट्रांसफर करने जा रहा है।

रणनीतिक वार्ता: इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई चर्चाओं में ही तय हो गई थी।

'मेक इन इंडिया' को पंख: मझगांव डॉक और TKMS की जुगलबंदी

इस प्रोजेक्ट के तहत छह एडवांस सबमरीन का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए वैश्विक दिग्गज कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और भारत की सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मिलकर काम करेंगी।

"टाइप 212 क्लास की ये सबमरीन अपनी 'साइलेंट ऑपरेटिंग' क्षमता और अचूक मारक क्षमता के लिए जानी जाती हैं। इनका भारत में बनना नौसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।" — रक्षा विशेषज्ञ

डिफेंस रोडमैप: सिर्फ सबमरीन ही नहीं, और भी बहुत कुछ

दोनों देशों के बीच केवल सबमरीन ही नहीं, बल्कि एक व्यापक 'डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन रोडमैप' पर भी हस्ताक्षर हुए हैं:

संयुक्त विकास: हाई-टेक रक्षा उपकरणों का मिलकर विकास और उत्पादन करना।

ट्रेनिंग: संयुक्त सैन्य अभ्यास और क्षमता निर्माण के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए विशेष ट्रेनिंग समझौता।

ग्लोबल सुरक्षा: राजनाथ सिंह और पिस्टोरियस ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और विशेष रूप से हिंद महासागर में स्थिरता पर विस्तार से चर्चा की।

चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता?

हिंद महासागर में बढ़ती चुनौतियों और पड़ोसी देशों की सक्रियता के बीच भारत के लिए अपनी अंडरवाटर (पनडुब्बी) शक्ति को बढ़ाना अनिवार्य हो गया था।

अपडेटेड फ्लीट: यह डील भारतीय नौसेना की पुरानी पनडुब्बियों की जगह अत्याधुनिक फ्लीट को शामिल करने में मदद करेगी।

आत्मनिर्भरता: तकनीक हस्तांतरण से भविष्य में भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता कम होगी।

मेक इन इंडिया: 75 हजार करोड़ का निवेश भारत के घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

निष्कर्ष: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा भारत को एक 'डिफेंस हब' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई है। जर्मनी के साथ यह रणनीतिक साझेदारी न केवल भारत की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य साख को भी मजबूती देगी।

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