NATO में अमेरिका का 'इनाम और सजा' कार्ड: 'अच्छे' और 'बुरे' सहयोगियों की लिस्ट तैयार, ईरान युद्ध बना पैमाना

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नाटो के सदस्य देशों को उनकी वफादारी और योगदान के आधार पर 'अच्छे' और 'बुरे' सहयोगियों की श्रेणियों में विभाजित करने की एक अभूतपूर्व योजना तैयार की है। पोलैंड और बाल्टिक देश: पोलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे देश इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। फ्रांस, स्पेन, इटली, ग्रीस और तुर्की जैसे देशों ने अमेरिका को सैन्य सहायता देने से इनकार कर दिया है।

23 Apr 2026  |  2

 

वॉशिंगटन/ब्रसेल्स: उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के भीतर एक बड़ा कूटनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नाटो के सदस्य देशों को उनकी वफादारी और योगदान के आधार पर 'अच्छे' और 'बुरे' सहयोगियों की श्रेणियों में विभाजित करने की एक अभूतपूर्व योजना तैयार की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन देशों पर दबाव बनाना है जिन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य संघर्ष में अमेरिका का सक्रिय समर्थन नहीं किया है।

ईरान युद्ध: वफादारी की नई कसौटी

'द पॉलिटिको' की रिपोर्ट के अनुसार, यह सूची नाटो महासचिव मार्क रुटे के अमेरिका दौरे से ठीक पहले तैयार की गई थी। इस नीति के केंद्र में 'ईरान संकट' है। अमेरिका ने उन देशों को 'आदर्श सहयोगी' माना है जिन्होंने अपनी जमीन पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी या युद्ध में सैन्य समर्थन का वादा किया।

"जो देश अमेरिका के सुरक्षा कवच का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें जिम्मेदारी भी साझा करनी होगी। रक्षा खर्च बढ़ाना और संकट में साथ देना ही भविष्य के रिश्तों का आधार होगा।" — पीट हेगसेथ, अमेरिकी रक्षा मंत्री

किसे मिलेगा 'इनाम' और किसे 'सजा'?

अमेरिकी प्रशासन की इस नई रणनीति के तहत सहयोगियों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींच दी गई है:

आदर्श सहयोगी (फायदे में रहने वाले): * पोलैंड और बाल्टिक देश: पोलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे देश इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। पोलैंड पहले ही 10,000 अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी कर रहा है।

समर्थक गुट: चेक रिपब्लिक, अल्बानिया, रोमानिया और बुल्गारिया ने भी ईरान मामले पर अमेरिका का खुलकर साथ दिया है।

लाभ: इन देशों को अधिक सैन्य सहायता, आधुनिक हथियारों की प्राथमिकता और उन्नत सुरक्षा गारंटी मिलेगी।

असहयोगी देश (सजा के दायरे में):

विद्रोही स्वर: फ्रांस, स्पेन, इटली, ग्रीस और तुर्की जैसे देशों ने अमेरिका को सैन्य सहायता देने से इनकार कर दिया है।

बीच का रास्ता: यूके ने पहले इनकार किया, लेकिन बाद में सीमित सैन्य बेस इस्तेमाल की मंजूरी दी।

संभावित कार्रवाई: इन देशों से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, सैन्य अभ्यासों में कटौती और हथियारों की सप्लाई रोकी जा सकती है।

नाटो की एकता पर संकट के बादल

अमेरिका की इस 'पुरस्कार और दंड' की नीति ने यूरोप में गहरी चिंता पैदा कर दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का वर्गीकरण नाटो की सामूहिक रक्षा की मूल अवधारणा (Article 5) को कमजोर कर सकता है।

पक्षतर्क / चिंता
ट्रंप प्रशासनसहयोगियों को अपना रक्षा बजट बढ़ाना चाहिए और अमेरिका पर निर्भरता कम करनी चाहिए।
आलोचकइनाम और सजा की नीति से गठबंधन में दरार आएगी और रूस-ईरान जैसे प्रतिद्वंद्वियों को फायदा होगा।
अमेरिकी सीनेटरसीनेटर रोजर विकर जैसे नेताओं का मानना है कि सहयोगियों का अपमान करने से दीर्घकालिक रिश्तों को नुकसान पहुँचेगा।

भविष्य की चुनौतियां

यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो यह शीत युद्ध के बाद के सबसे बड़े कूटनीतिक बदलाव का संकेत होगा। यूरोप और अमेरिका के बीच की खाई, जो पहले से ही व्यापार और जलवायु मुद्दों पर गहरी थी, अब रक्षा क्षेत्र में भी 'आर-पार' की स्थिति में पहुँच गई है।

निष्कर्ष: अमेरिका अब केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कड़े फैसलों से नाटो की तस्वीर बदलना चाहता है। ईरान युद्ध ने ट्रंप प्रशासन को यह मौका दे दिया है कि वह 'मित्रों' और 'नाममात्र के सहयोगियों' के बीच का अंतर स्पष्ट कर दे। आने वाले महीने नाटो की एकता की असली परीक्षा होंगे।

अन्य खबरें