नई दिल्ली: देश की चुनावी निष्पक्षता को लेकर सियासी गलियारों में घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए राज्यसभा में एक औपचारिक नोटिस पेश किया है। इस नोटिस पर विपक्ष के 73 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जो सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता को दर्शाता है।
"संविधान पर हमला है ज्ञानेश कुमार का पद पर बने रहना"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस कदम की जानकारी साझा की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर 'साबित दुर्व्यवहार' (Proven Misbehaviour) का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके खिलाफ नौ विशिष्ट और गंभीर आरोप हैं।
रमेश ने अपने पोस्ट में लिखा:
संवैधानिक प्रावधान: यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 324(5) (जिसे अनुच्छेद 124(4) के साथ पढ़ा जाए) और चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) के तहत दिया गया है।
गंभीर चूक: आरोप है कि 15 मार्च 2026 के बाद से सीईसी ने अपने कार्यों और निर्णयों में भारी चूक की है।
पक्षपात का आरोप: जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारों पर काम कर रहे हैं, जो भारतीय लोकतंत्र और संविधान के लिए शर्मनाक है।
विपक्ष की एकजुटता: TMC ने भी दी चेतावनी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी इस रुख का समर्थन करते हुए पहले ही संकेत दे दिए थे कि विपक्ष अतिरिक्त आरोपों के साथ नया महाभियोग प्रस्ताव लाएगा। उन्होंने बताया कि लगभग 19 राजनीतिक दल इस मांग पर एक साथ हैं।
क्या हैं प्रमुख बिंदु?
प्रस्ताव का आधार: 'न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968' के दायरे में सीईसी के खिलाफ विस्तृत दस्तावेजों के साथ आरोप पत्र तैयार किया गया है।
हटाने की प्रक्रिया: विपक्ष ने राष्ट्रपति से संबोधन पेश करने की मांग की है ताकि ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जा सके।
सियासी मायने: विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग जैसी संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर विपक्ष आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष: विपक्ष का यह कदम चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के बीच के टकराव को एक नए स्तर पर ले गया है। अब सबकी नजरें राज्यसभा सचिवालय और राष्ट्रपति भवन की ओर हैं कि इस ऐतिहासिक नोटिस पर क्या कार्रवाई होती है।