जेनेवा/नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन के दौर में वैश्विक मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट ले रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने एक ताजा चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 'अल नीनो' (El Niño) की स्थिति मई से जुलाई के बीच ही विकसित हो सकती है। पहले इसके अगस्त-सितंबर में आने का अनुमान था, लेकिन अब इसके जल्दी आने की संभावना ने भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
क्या है अल नीनो और क्यों है यह खतरनाक?
अल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है जो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी के कारण उत्पन्न होती है। यह आमतौर पर हर 2 से 7 साल में एक बार आती है और 9 से 12 महीने तक प्रभावी रहती है।
तापमान में वृद्धि: इसके कारण वैश्विक स्तर पर गर्मी बढ़ती है।
बारिश का पैटर्न: अल नीनो के कारण अक्सर ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और भारत में सूखे जैसे हालात पैदा होते हैं, जबकि दक्षिण अमेरिका में भारी बारिश होती है।
हिमालय में घटती बर्फ: 20 सालों का न्यूनतम स्तर
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। इस साल हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में बर्फ की मात्रा सामान्य से 27.8% कम दर्ज की गई है, जो पिछले दो दशकों में सबसे कम है।
"बर्फ का यह स्तर गिरने से उन नदियों के जलस्तर पर सीधा असर पड़ेगा, जिन पर करीब 2 अरब लोग निर्भर हैं। यह भविष्य में जल संकट की एक बड़ी आहट है।" — रिपोर्ट अंश
भारत पर संभावित असर: कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही इस साल सामान्य से कम बारिश का संकेत दे चुका है। अल नीनो के जल्दी सक्रिय होने से मानसून के प्रभावित होने की आशंका और प्रबल हो गई है:
कृषि: मानसून में देरी या कम बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ऊर्जा व स्वास्थ्य: अत्यधिक गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ेगी और हीटवेव (Heatwave) से स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां पैदा होंगी।
जल प्रबंधन: गिरते जलस्तर के कारण जलाशयों के प्रबंधन के लिए अभी से ठोस रणनीति की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों की राय
WMO के जलवायु पूर्वानुमान प्रमुख विलफ्रान मौफूमा ओकिया के अनुसार, सभी वैश्विक मॉडल अब अल नीनो के मजबूत होने की पुष्टि कर रहे हैं। हालांकि साल की शुरुआत में स्थिति तटस्थ (Neutral) थी, लेकिन अब समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
निष्कर्ष: डब्ल्यूएमओ की यह चेतावनी नीति निर्माताओं के लिए एक 'अलार्म कॉल' है। कृषि, जल संसाधन और स्वास्थ्य मंत्रालयों को आने वाले महीनों में भीषण गर्मी और अनियमित वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) तैयार रखनी होंगी।