चंडीगढ़ | पंजाब की खेती और जल संरक्षण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार के 'रोपड़ नहरी नेटवर्क पुनर्जीवन' अभियान के सुखद परिणाम सामने आने लगे हैं। लुधियाना और मालेरकोटला के दर्जनों गाँवों में करीब 40 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद नहरी पानी खेतों तक पहुँचा है, जिससे खेती की लागत में कमी और भूजल स्तर में सुधार की नई उम्मीद जगी है।
आंकड़ों में सिंचाई क्रांति: 200% की भारी बढ़ोतरी
जल संसाधन मंत्री बरिंद्र कुमार गोयल ने आधिकारिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि रोपड़ नहरी नेटवर्क के तहत सिंचाई सुधारों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है:
क्षेत्रफल में विस्तार: वर्ष 2025-26 के दौरान सिंचाई क्षेत्र 29,488 एकड़ से बढ़कर 85,447 एकड़ हो गया है।
कुल लक्ष्य: सरकार जल्द ही 3,882 एकड़ अतिरिक्त भूमि को जोड़कर इसे 89,329 एकड़ तक पहुँचाने वाली है।
यह वृद्धि प्रतिशत के लिहाज से लगभग 200% है, जिसे राज्य के कृषि इतिहास में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
दशकों का सूखा हुआ खत्म: इन गाँवों में पहुँचा पानी
पंजाब के कई ऐसे इलाके थे जहाँ नहरी नेटवर्क कागजों पर तो था, लेकिन ज़मीन पर पानी नहीं पहुँच रहा था। सरकार के प्रयासों से अब रुड़का, पंडोरी, ढट्ट, बड़ूंदी, तुंगाहेड़ी और कंगनवाल जैसे गाँवों के खेतों में 4 दशकों बाद पानी पहुँचा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि नहरी पानी मिलने से अब उन्हें महंगे डीजल, ट्यूबवेल की मरम्मत और बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
नहरी पानी के उपयोग में रिकॉर्ड सुधार
मंत्री गोयल ने बताया कि 2022 में जब भगवंत मान सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब राज्य में नहरी पानी का उपयोग मात्र 26.5 प्रतिशत था।
"हमने बंद पड़ी नहरों, डिस्ट्रिब्यूटरीज़ और खालों (नहरी नालियों) की सफाई और मरम्मत का व्यापक अभियान चलाया। आज हम अपने लक्ष्य का लगभग 78 प्रतिशत कार्य पूरा कर चुके हैं, जिससे भूजल पर निर्भरता कम हुई है।"
भविष्य की योजनाएं: लिफ्ट सिंचाई और नए ढांचे
सरकार केवल पुरानी नहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि नए बुनियादी ढांचों पर भी काम कर रही है:
लिफ्ट सिंचाई: समलाह, पहाड़पुर, लाखेड़ और मिधवां गाँवों में आधुनिक स्टोरेज टैंक तैयार किए गए हैं।
विस्तार: श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र में नई भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
टिकाऊ कृषि की ओर बढ़ते कदम
यह पहल न केवल किसानों की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित कर रही है, बल्कि पंजाब के गिरते भूजल स्तर (Water Table) को बचाने में भी संजीवनी का काम करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नहरी सिंचाई को बढ़ावा देना 'टिकाऊ कृषि' की दिशा में सबसे सटीक कदम है।
मुख्य निष्कर्ष:
बिजली की बचत: ट्यूबवेलों का उपयोग कम होने से सरकारी खजाने पर बिजली सब्सिडी का बोझ कम होगा।
आर्थिक लाभ: सिंचाई लागत कम होने से किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होगी।
पर्यावरण: भूजल दोहन में कमी आने से भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी सुरक्षित होगा।